डिजिटल सशक्तिकरण बदलेगा देश की तसवीर

» भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है. वर्ष 2018 तक यह आंकड़ा 50 करोड़ को पार कर जायेगा. इससे 200 अरब डॉलर की डिजिटल इकोनॉमी खड़ी होने के साथ अनेक नियमों को नये सिरे से गढ़ा जा सकता है. साथ ही देश में कारोबार के तरीकों में आमूल-चूल बदलाव आने की उम्मीद है.
»  कैसे होगा यह सब, क्या हैं इसकी राह में चुनौतियां? देश के दूरदराज इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने की किस तरह की बन रही है योजना आदि अनेक संबंधित पहलुओं के बारे में आज हम चर्चा कर रहे हैं Iआइये ...

»  क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है कि इंटरनेट के आने से आपकी जिंदगी में कितना बदलाव आया है. जरा सोचिए कि अगर इंटरनेट नहीं होता तो आपकी दुनिया किस तरह की होती. इंटरनेट ने बहुत कम समय में क्रांतिकारी तकनीकी बदलाव ला दिया है. शायद यही वजह है कि इसका विस्तार काफी तेजी से हुआ है.
» इसके विस्तार पर यदि आप नजर डालेंगे तो पायेंगे कि भारत में इंटरनेट की शुरुआत के पहले 10 वर्षो में केवल एक करोड़ लोग ही इससे जुड़े थे और उसके अगले एक दशक में इससे 10 करोड़ लोग जुड़ गये. वर्ष 2010 से 2013 के बीच महज तीन वर्षो में अगले 10 करोड़ लोग इससे जुड़े और इस तरह दिसंबर, 2013 तक भारत में इंटरनेट इस्तेमालकर्ताओं की संख्या 30 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी थी.

50 करोड़ की डिजिटल आबादी
» भारत में जिस रफ्तार से इंटरनेट इस्तेमालकर्ताओं की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि वर्ष 2018- 19 तक देश में इनकी संख्या 50 करोड़ के आंकड़े को पार कर जायेगी. देश की यह 50 करोड़ ‘डिजिटल आबादी’ भारत की अर्थव्यवस्था समेत कारोबार का तरीका, गवर्नेस और सामाजिक तौर तरीकों में आमूल-चूल बदलाव ला सकती है.
» इंटरनेट के इस ग्रोथ से अर्थव्यवस्था में इंटरनेट संबंधित गतिविधियों की हिस्सेदारी 200 अरब डॉलर तक पहुंच जायेगी.
» इससे इ-कॉमर्स के क्षेत्र में व्यापक बदलाव आयेगा, जो आज से पांच गुना ज्यादा बड़ा होगा.
» साथ ही इससे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी विस्तार मिलेगा.

स्टार्टअप्स की बढ़ेगी संख्या
» भारत में इंटरनेट उपभोक्ताओं की बढ़ती संख्या एक बड़ा बदलाव लायेगी. 50 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ताओं वाला देश भारत पूरे यूरोप के बराबर होगा.
» उम्मीद है कि ऐसा होने से वैश्विक निवेशकों का रुख तेजी से भारत की ओर बढ़ेगा, जिससे देश में स्टार्टअप्स की संख्या बढ़ेगी.

जॉब सेक्टर में तेजी
» वैश्विक निवेशकों के आने से जॉब सेक्टर में भी तेजी आयेगी.
» अनुमान के मुताबिक, इंटरनेट के कारण देश में अभी चार लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता है, जो 2020 तक बढ़ कर 20 करोड़ तक पहुंच जायेगा.
» डेलॉइट कंसल्टिंग रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की इंटरनेट इकोनॉमी में साढ़े छह करोड़ नये रोजगार पैदा हो सकते हैं.

सामाजिक बदलाव:-
» देश में कनेक्टिविटी बढ़ने से इसका सीधा असर व्यापार पर पड़ेगा और इससे सामाजिक -आर्थिक सूचकों में सुधार होगा. डेलॉइट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बदलाव या सुधार को जानने के लिए दो अलग-अलग गांवों का अध्ययन किया, जिसमें एक में बेहतर कनेक्टिविटी है और दूसरे में नहीं है.
» अध्ययन के निष्कर्ष में पाया गया कि बेहतर कनेक्टिविटी वाले गांव में बाल मृत्यु दर में 14 फीसदी की कमी आयी है.

गवर्नेस में सुधार:-
» इसका सबसे बड़ा फायदा आम आदमी को गवर्नेस में सुधार के तौर पर दिखेगा. इंटरनेट ट्रांजेक्शन को ट्रैक करने वाली एक वेबसाइट ‘इताल डॉट जीओवी डॉट इन’ के मुताबिक, वर्ष 2013 और 2014 के बीच इ-गवर्नेस ट्रांजेक्शंस की संख्या 50 करोड़ से बढ़ कर 1.7 अरब तक पहुंच गयी है.

बड़ी चुनौती:-
» भारत में ज्यादा इंटरनेट कनेक्टिविटी 2जी के माध्यम से है. देश में तकरीबन 90 फीसदी लोग प्री-पेड मोबाइल सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं. प्रत्येक उपभोक्ता औसतन 150 रुपये का रिचार्ज कराता है. कई लोग तो 50 रुपये तक का ही रिचार्ज कराते हैं. ऐसे में 3जी सेवाएं मुहैया कराना बड़ी चुनौती है.
» हालांकि, इस मामले में एक बड़ी उपलब्धि यह भी देखने में आयी है. ‘ओजोन’ के अनुसार, पिछले साल जहां प्रत्येक उपभोक्ता इंटरनेट का इस्तेमाल रोजाना औसतन 10 मिनट करता था, वहीं अब 45 मिनट तक करता है.
» इस दिशा में एक बड़ी चुनौती होगी ब्रॉडबैंड का धीमा होना.

गूगल का लून बैलून प्रोजेक्ट
» वैश्विक इंटरनेट का सबसे बड़ा नाम गूगल अपनी महत्वाकांक्षी लून परियोजना भारत में भी ला रहा है. रिपोर्टो के मुताबिक, कंपनी भारत सरकार के संबंधित विभागों और विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों के साथ विचार-विमर्श कर रही है.
» संभावना है कि अगले वर्ष के प्रारंभ में यह सेवा भारत में शुरू हो सकती है. इस प्रोजेक्ट में ऊंचाई पर उड़ते गुब्बारों की मदद से दूर-दराज के इलाकों में इंटरनेट की सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य है, जिससे दुनिया के पांच अरब लोगों को जोड़ा जा सके.
» यह सेवा बहुत सस्ती होगी ताकि अधिक-से-अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें. वर्तमान में न्यूजीलैंड के साउथ आइलैंड से उड़ाये गये 30 गुब्बारे काम कर रहे हैं.
» भारत में इस सेवा का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण भारत और सुदूर क्षेत्रों में इंटरनेट का विस्तार करना है. इस परियोजना में लगभग 20 से 32 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी के समताप मंडल में गुब्बारे अवस्थित होंगे और सॉफ्टवेयर के जरिये हवा की दिशा के अनुरूप चलायमान होंगे. इस हवाई वायरलेस सेवा से 3जी की गति के बराबर कनेक्शन मिल सकता है.
» एक बैलून करीब 100 दिनों तक ऊपर रह सकता है और अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर है. इसी तरहकी एक सेवा शुरू करने की घोषणा पहले फेसबुक ने भी की थी, जिसका मुख्य कार्य क्षेत्र अफ्रीका होगा.
» माना जा रहा है कि अगर गूगल की परियोजना भारत में शुरू होती है तो देशभर में लगभग दो लाख टावर स्थापित किये जायेंगे, जो बैलूनों से तरंगों को लोगों के मोबाइल और स्मार्ट फोन तक पहुंचायेंगे. लून बैलून सेवा ग्रामीण भारत में इंटरनेट की पहुंच को सुनिश्चित करने की दिशा में वरदान साबित हो सकती है.

आम आदमी को आसानी
» दरअसल, रेल टिकट हासिल करने से लेकर बैंकिंग संबंधी कामकाज निबटाने, डॉक्यूमेंट भेजने या होटल व टैक्सी बुक कराने समेत विभिन्न प्रकार के सामानों की खरीदारी करना इंटरनेट के माध्यम से आसान हो गया है
» यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अब आप सबकुछ घर बैठे ही इंटरनेट के जरिये कर सकते हैं.
» महज 25 साल के सफर में वर्ल्ड वाइड वेब (डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू) ने हमारे जीवन और कामकाज के तौर-तरीकों को इतना बदल दिया है.
» आज इंटरनेट का इस्तेमाल महज इमेल तक ही नहीं सीमित है, बल्कि आज यह लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. एक ओर जहां इंटरनेट के माध्यम से कारोबार वैश्विक स्तर तक फैल रहा है, वहीं इसने लोगों की जिंदगी को सुविधाजनक बनाने की दिशा में भी क्रांतिकारी भूमिका निभायी है.

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