बौद्धिक सम्पत्ति का अधिकार और विश्व व्यापार संगठन

» विश्व व्यासपार संगठन (डब्यूरार टी ओ) एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना राष्ट्रों के बीच सुव्यवस्थित और मुक्त व्यापार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।

» इस प्रयोजन के लिए यह सदस्य देशों के बीच करार की वार्ताएं करने हेतु एक मंच की व्यवस्था करता है।

»  ये करार कृषि, कपड़ा और परिधान, बैकिंग, दूरसंचार औद्योगिक मानकों और उत्पाद सुरक्षा, खाद्य स्वच्छता विनियमों और इससे ऐसे अनेकों से संबंधित होते हैं और यह बहु पक्षीय व्यापार प्रणाली की नींव है।

» ऐसी ही एक महत्वपूर्ण करार 'बौद्धिक सम्पवदा अधिकारों के व्या पार संबंधी पहलुओं संबंधी करार (टीआरआईपीएस TRIPS)' है।

» यह पहली बार अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली में बौद्धिक सम्पदा संबधी कानून बनाया। यह बहु पक्षीय व्यापार वार्ता के उरूग्वे दौर का परिणाम था।

» यह करार दुनिया भर में बौद्धिक सम्पयदा अधिकार (आईपीआर) के संरक्षण और प्रवर्तन के विस्तार में मौजूद मतभेदों को उन्हें साझा न्यूनतम अंतरराष्ट्रीय सहमत व्यापार मानकों के अधीन रखकर कम कर दिया है।

»  सदस्य देशों से निर्धारित समय ढांचा के भीतर इन मानकों का अनुपालन करने अंतरराष्ट्रीय व्यपार में विकृतियों एवं बाधाओं को कम करने के लिए बौद्धिक सम्पदा अधिकारों की प्रभावी रूप से रक्षा करने की अपेक्षा की जाती है ट्रिप्स के तहत सदस्य देशों की तीन बाध्यताएं हैं :-


1. घरेलू कानूनों के माध्यम से न्यूनतम बौद्धिक सम्पदा अधिकार की रक्षा करना।
2. इन अधिकारों का प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित करना।
3. विवादों को अंतरराष्ट्रीय विश्व व्यातपार विवाद निपटान के समक्ष रखने के लिए सहमत होना।
 

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