जलमार्ग और उनसे लाभ

101 नए राष्ट्रीय जलमार्गों को विकसित किया जायेगा • केंद्र सरकार देश के 101 और अंतर्देशीय जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग का दर्जा देगी। अभी केवल पांच राष्ट्रीय जलमार्ग हैं। 

• नए राष्ट्रीय जलमार्गों की घोषणा के लिए जल्द ही संसद में विधेयक लाया जाएगा। इस संबंध में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला लिया गया।

• अंतर्देशीय जलमार्गों के रूप में प्रयुक्त हो रही नदियों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित करने के पीछे सरकार का मकसद इन्हें गहराकर इनके किनारे टर्मिनल व बंदरगाहों का विकास करना है। 

• इससे माल यातायात और यात्री पर्यटन के लिए इन नदियों का इस्तेमाल बढ़ेगा।

• इन जलमार्गों पर बनने वाले टर्मिनल और बंदरगाहों को रेल व सड़क मार्गों से जोड़कर इन्हें मल्टी मोडल यातायात प्रणाली का हिस्सा बनाया जाएगा। जलमार्ग विकास परियोजना के तहत इस संबंध में व्यवसाय विकास मॉडल तैयार करने के लिए व्यापक अध्ययन किए जा रहे हैं।

घटेगी परिवहन की लागत:-

• सरकार का मानना है कि जल यातायात को बढ़ावा मिलने से परिवहन लागत में खासी कमी आएगी। सड़क पर एक हॉर्सपावर से केवल 150 किलो माल ढोया जा सकता है। रेल पर इतनी ही शक्ति से 500 किलो माल का परिवहन संभव है। वहीं, जल पर एक हॉर्सपावर से 4,000 किलो माल ढोया जा सकता है।

• इसी प्रकार एक लीटर ईंधन से सड़क पर 24 टन सामान को एक किलोमीटर तक ले जाया जा सकता है। इतने ही ईंधन से रेल पर 85 टन और पानी पर 105 टन माल को एक किलोमीटर तक खींचा जा सकता है। 

• सड़क पर प्रति टन माल ढुलाई की लागत 2.58 रुपये है। वहीं, रेल से यह लागत सिर्फ 1.41 रुपये और जल से 1.06 रुपये है। 

• जलमार्ग विकसित करने पर आने वाली लागत भी सड़क व रेल मार्ग के मुकाबले कम है। 

• यही नहीं, जल परिवहन सर्वाधिक पर्यावरण अनुकूल भी है।

बनेगी विशेष प्रयोजन कंपनी

• कैबिनेट के एक अन्य निर्णय के तहत सरकार ने रेल और सड़क परिवहन, राजमार्ग व जहाजरानी मंत्रालय के बीच विशेष प्रयोजन कंपनी (एसपीवी) बनाने का निर्णय लिया है।

• यह एसपीवी प्रमुख बंदरगाहों को जोड़ने के लिए रेलवे लाइनें बिछाएगी। इसके अलावा सामानों की निकासी के लिए आधुनिक ढांचा तैयार करने, बंदरगाहों की आंतरिक रेलवे लाइनों का प्रबंधन व संचालन तथा पोर्ट संबंधी रेल परियोजनाओं के लिए धन जुटाने का काम करेगी।

• इस संबंध में प्रमुख बंदरगाहों में तकरीबन 40 परियोजनाओं की पहचान की गई है। इन पर 2,372 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। एसपीवी की आरंभिक अधिकृत पूंजी 500 करोड़ रुपये होगी। इसमें पेशेवरों के अलावा रेलवे और बंदरगाह क्षेत्र के विशेषज्ञों को रखा जाएगा।

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