अभिलिखित वन क्षेत्र, वनावरण एवं वृक्षावरण (Tree Cover)

» अभिलिखित वन क्षेत्र (Recorded Forest Area) के अंतर्गत सरकारी रिकॉर्डों में ‘वन’ के रूप में अभिलिखित समस्त भौगोलिक क्षेत्र शामिल होता है, चाहे उसमें वनावरण/वृक्षावरण हों या न हों। 

»  इसमें मुख्यतः भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत संस्थापित आरक्षित वन क्षेत्र (Reserved Forest Area) तथा संरक्षित वन क्षेत्र (Protected Forest Area) आते हैं। 

»  इसमें राज्यों के अधिनियमों द्वारा संस्थापित और राजस्व रिकॉर्डों में वन के रूप में अभिलिखित क्षेत्र भी शामिल होते हैं जिन्हें ‘अवर्गीकृत वन’ (Unclassed Forest) कहा जाता है।

»  दूसरी ओर, भारत वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR) में प्रयुक्त वनावरण (Forest Cover) क्षेत्र के तहत एक हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाले ऐसे समस्त भौगोलिक क्षेत्रों (अभिलिखित वन के भीतर और बाहर सभी क्षेत्रों) को शामिल किया जाता है जहां वृक्ष छत्र घनत्व (Tree Canopy Density) 10 प्रतिशत से अधिक हो। इसके तहत मैंग्रोव वन क्षेत्र भी शामिल होते हैं। 

- इसे तीन भागों में बांटा जाता है :

अति सघन वन (VDF-Very Dense Forest), जिनका वृक्ष छत्र घनत्व 70 प्रतिशत से अधिक होता है;

मध्यम सघन वन (MDF – Moderately Dense Forest), जिनका वृक्ष छत्र घनत्व 40-70 प्रतिशत के बीच होता है; तथा

खुले वन (OF-Open Forest), जिनका वृक्ष छत्र घनत्व 10-40 प्रतिशत के मध्य होता है।

उल्लेखनीय है कि 10 प्रतिशत से कम वृक्ष छत्र घनत्व वाली निम्नस्तरीय वन भूमि को वनावरण में शामिल नहीं किया जाता तथा इन्हें झाड़ी (Scurb) की श्रेणी में रखते हैं।

»  ISFR- 2013 के अनुसार, देश में झाड़ियों का क्षेत्रफल 41,383 वर्ग किमी. है जो कुल भौगोलिक क्षेत्र का 1.26 प्रतिशत है।

वृक्षावरण (Tree Cover)

»  अभिलिखित वन क्षेत्र के बाहर के तथा 1 हेक्टेयर क्षेत्रफल से कम क्षेत्र वाले वृक्षीय क्षेत्रों (वनावरण क्षेत्र के अतिरिक्त) को वृक्षावरण (Tree Cover) क्षेत्र के अंतर्गत शामिल किया जाता है।

 

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