स्मार्ट सिटी की आखिर क्या हो पहचान

स्मार्ट सिटी की आखिर क्या हो पहचान?

»  यहां पर मैं ऐसे 10 बिंदुओं का जिक्र कर रहा हूं जो काफी हद तक स्मार्ट सिटी की अवधारणा को स्पष्टï कर देंगे।

 

1. सूचना, संचार और प्रौद्योगिकी (आईसीटी) आधारित प्रशासन: सूचना और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों ने सूचना-प्रौद्योगिकी को अपनी-अपनी आक्रामक प्रस्तुतियों की मदद से लगभग अपहृत कर लिया है और उन्होंने स्मार्ट सिटी की परिभाषा को आईटी समर्थित प्रशासन और शासन तक सीमित कर दिया है। ऐसी सीमित परिभाषा वांछित नहीं है।


- आईसीटी को लागू करना यकीनन एक अहम काम है और इसे प्राय: स्मार्ट सरकार कहकर पुकारा जाता है। इसके तहत प्रौद्योगिकी का एकीकृत प्लेटफार्म तैयार किया जाता है जिस तक विभिन्न माध्यमों से आसानी से पहुंचा जा सके। यह पारदर्शिता और काम की गति बढ़ाने, भागीदारी सुनिश्चित करने तथा समस्या निवारण करने के लिहाज से काफी अहम है। उदाहरण के लिए 10 दिसंबर 2014 को राष्टï्रपति महोदय ने बेंगलूरु में कर्नाटक मोबाइल वन ऐप की शुरुआत की। यह ऐप लोगों को मोबाइल फोन के जरिये तमाम ई-प्रशासन संबंधी सेवाएं मुहैया कराएगा।

 

2. किफायती उपयोग : ऊर्जा, जल, ठोस और बहने योग्य कचरा: अक्सर आईटी के बाद इसी क्षेत्र के बारे में चर्चा की जाती है। स्मार्ट सिटी की कुछ जरूरी पहचानों में स्मार्ट मीटर, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा संरक्षण, जल संरक्षण, बहने वाले कचरे का पुनर्चक्रण, ठोस कचरे का वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण आदि सभी शामिल हैं।

 

3. सार्थक पीपीपी: निजी-सार्वजनिक भागीदारी (पीपीपी)का रचनात्मक इस्तेमाल स्मार्ट सिटी की अवधारणा में अहम स्थान रखता है। पीपीपी का इस्तेमाल न केवल अत्यधिक वांछित पूंजी के लिए किया जा सकता है बल्कि विभिन्न सुविधाओं की प्रभावी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भी इसे प्रयोग में लाया जा सकता है। पीपीपी की बात की जाए तो स्वास्थ्य सेवा से लेकर स्ट्रीट लाइट लगाने तक में पीपीपी का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे में जहां भी सेवा और प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क लगाने के अवसरों के बीच सीधा संबंध हो वहां पीपीपी का प्रयोग किया जाना चाहिए।

 

4. रक्षा और सुरक्षा: आम जनता की बातचीत में यह पहलू भी खासा अहम है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि इन दिनों महिला सुरक्षा, सड़क पर झगड़ों, लूट और बुजुर्गों तथा कम उम्र के लोगों पर हमले आदि की घटनाएं बहुत तेज हो गई हैं। साफ जाहिर है कि नेटवर्क और वीडियो कैमरा, सार्वजनिक स्थानों पर रोशनी की व्यवस्था, पुुलिस की सख्त निगरानी और गश्त, कहीं भी प्रवेश के लिए पहचान जरूरी करना तथा आपातकालीन परिस्थितियों में तेजी से प्रतिक्रिया देना आदि अपेक्षित हैं।

 

5. वित्तीय स्थायित्व: सन 1974 में हुआ संविधान का 74वां संशोधन कस्बों और शहरों को यह आजादी देता है कि वे अपना भाग्य खुद बनाएं। ऐसे में आर्थिक आजादी ही सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू नजर आती है। आर्थिक आजादी तभी हासिल की जा सकती है जब राजस्व के सभी स्रोतों का पूरा इस्तेमाल हो। इसमें संपत्ति कर, विज्ञापन आदि के अलावा तमाम उपभोक्ता सेवाओं के लिए शुल्क वसूल करना आदि शामिल है। इसका सीधा संबंध राजकोषीय अनुशासन से भी है। क्योंकि उसकी मदद से म्युनिसिपल बॉन्ड जैसे दीर्घावधि के ऋण के प्रतिरूप शुरू किए जा सकते हैं।

 

6. नागरिकों की सहभागिता वाली स्थानीय सरकार: स्थानीय मसलों पर नागरिकों की उत्साही भागीदारी के लिए निर्वाचन की प्रक्रिया और भागीदारी की सावधानीपूर्वक तैयारी। फिलहाल नगर निकाय के चुनावों के लिए जो उपेक्षा का भाव है उसमें व्यापक बदलाव लाने होंगे।

 

7. पर्याप्त सामाजिक पूंजी: स्मार्ट सिटी को समुचित सामाजिक बुनियादी ढांचों से वंचित नहीं रखा जा सकता है। विद्यालय, अस्पताल, सार्वजनिक स्थान, खेल और अन्य रचनात्मक कार्यों के लिए मैदान, खुदरा और मनोरंजन से जुड़े स्थान आदि सभी इसमें शामिल हैं। जाहिर है इस शहर को एक दिमाग, हाथ और पैर के अलावा एक दिल भी चाहिए जो रोजाना खुशी से धड़कना चाहे।

 

8. परिवहन उन्मुख आवास: यहां पैदल चलकर काम पर जाना सबसे बेहरीन निदान लगता है। हालांकि इसके बावजूद बेहतर और सुगम सार्वजनिक परिवहन को पूरे शहर में सुनिश्चित करने निजी वाहनों का इस्तेमाल कम होगा। इसके अलावा बैटरी चालित कार और साइकिल के लिए अलग पथ बनाना भी इस योजना में शामिल होना चाहिए।

 

9. हरियाली: कार्बन उत्सर्जन को एकदम सीमित करना और समूची स्मार्ट सिटी को पर्यावरण के अनुकूल बनाना। पार्कों का निर्माण और समुचित खुला स्थान सुनिश्चित करना, प्रदूषण से बचाव, नवीकरणीय वस्तुओं का इस्तेमाल, उनका संरक्षण और पुनर्चक्रण आदि इस लिहाज से अहम हैं।

 

10.न्यूनतम आबादी की शर्त: नवंबर 2014 के आखिर में पैनासोनिक कॉर्पोरेशन ने अपने अपने नए कारोबार की घोषणा की जिसके तहत वह जापान के फुजीसावा में टिकाऊ स्मार्ट कस्बे (एसएसटी) बनाएगी। इनकी छतों पर सौर ऊर्जा पैनल होंगे, बिजली से चलने वाली कारें और साइकिल होंगी। बहरहाल 47 एकड़ क्षेत्र में करीब 1,000 मकान बनाए जाएंगे जिनमें करीब 3,000 की आबादी रहेगी। भारतीय संदर्भों में देखा जाए तो इसे शहर की परिभाषा में शामिल नहीं किया जा सकता है। भारत में करीब 5,545 शहरी बसावट हैं। शहर की परिभाषा में तो केवल ऐसे इलाके आते हैं जिनकी आबादी 100,000 और उससे ज्यादा हो। स्मार्ट सिटी के लिए भी न्यूनतम आबादी की सीमा कम से कम इतनी ही रखनी चाहिए।

 

»  इन सभी 10 लक्ष्यों को हासिल करना हालांकि बहुत ही आदर्शवादी सोच हो सकती है। ऐसे में अगर 10 में से सात लक्ष्य भी हासिल किए जा सके तो हमें किसी शहर को स्मार्ट सिटी कहने में गुरेज नहीं करना चाहिए।

 

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