सतत ऊर्जा और पर्यावरण के लिए हरित उत्पादकता: समय की आवश्यकता

सतत ऊर्जा और पर्यावरण के लिए हरित उत्पादकता: समय की आवश्यकता

»  औद्योगिक विकास की प्रक्रिया आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, लेकिन किसी भी औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण का ह्रास भी दिखाई पड़ता है। पर्यावरण का नुकसान कम करने के लिए कई दशकों से चले आ रहे परंपरागत तरीक़ों का इस्तेमाल केवल लक्षणों का उपचार साबित हुआ है।


»  विश्व इस समय पर्यावरण क्षति के रोग से जूझ रहा है और इसके असाध्य होने की संभावना का डर है। समय आ गया है कि प्रदूषण की आपात समस्या से निपटने के लिए, तकनीकी उपायों के मेल से कचरे को उत्पन्न होने से रोकने या उसके बहुमूल्य पदार्थों को पुनः इस्तेमाल के लिए प्रभावी क़दम उठाए जाएं।


"एक नया प्रतिमान":-
»  हरित उत्पादकता स्थायी निर्माण में एक नया प्रतिमान है जिसमें संसाधन संरक्षण और अपशिष्ट न्यूनीकरण की रणनीति पर्यावरण का प्रदर्शन और उत्पादकता बढ़ाने में मददगार है। उद्योगों की सततता के प्रति उत्पादकता का यह दृष्टिकोण, स्वच्छ उत्पादन प्रौद्योगिकी और उत्पाद के जीवन चक्र को निर्माण के विविध स्तरों पर, निरंतर सुधार की नीति के साथ, पर्यावरण के प्रदर्शन को मापने के लिए उचित संकेतकों और उपकरणों के विकास को अपनाने की मांग करता है। विश्लेषण में समस्त जीवन चक्र के बढ़ते प्रभावों का विस्तार, सुधार रणनीतियों और संकेतकों की जानकारियों को भी शामिल किया जा सकता है।


»  हरित उत्पादकता एक बेहतरीन सामाजिक-आर्थिक विकास है जो कि पर्यावरण को कम से कम या बगैर कोई क्षति पहुंचाए मानव जीवन की गुणवत्ता में सतत सुधार पर जोर देता है। उपयुक्त उत्पादकता और पर्यावरण प्रबंधन उपकरणों, तकनीकों और प्रौद्योगिकियों, जो कि किसी संगठन की लाभप्रदता और प्रतिस्पर्धी लाभ को बढ़ाने के साथ उसकी गतिविधियों, उत्पादों और सेवाओं के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते है, उनका यह एक संयुक्त अनुप्रयोग है।


अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के दोहन के कारण जहां एक ओर प्राकृतिक ऊर्जा की निधियों में कमी आ रही है वहीं, दूसरी ओर इसके अत्यधिक और असंतुलित प्रयोग के कारण, दुनिया को ग्लोबल वार्मिंग जैसी कठिन चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। पर्यावरणीय क्षति के प्रभावों के कुछ उदाहरणों में समुद्र के स्तर में वृद्धि, वर्षा में उतार चढ़ाव और अक्सर सूखे की स्थिति शामिल हैं। इन सभी चिंताओं ने हमें स्थिति का आकलन करने पर मजबूर किया और इससे सतत विकास के लिए हरित उत्पादकता की अवधारणा के जन्म को दिशा मिली।


ऊर्जा और पर्यावरणीय मुद्दों को समाविष्ट करने वाली सतत विकास की राह पर पर्याप्त चुनौतियां हैं। भविष्य में आकलित, जनसंख्या वृद्धि से जुड़ी समस्याओं को ऊर्जा प्रबंधन और प्रदूषण में कमी लाने वाली तकनीक काफी हद तक दूर कर देगी।


»  इसलिए, हरित उत्पादकता को लाभ में वृद्धि, स्वास्थ्य और सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के निर्माण, पर्यावरण संरक्षण को प्रसारित करने, विनियामक अनुपालन, कंपनी की छवि निर्माण और कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने के मुख्य उद्देश्यों के साथ शुरू किया गया था जिससे अंततः समग्र और पूर्ण विकास को बढ़ावा मिलेगा।


महात्मा गांधी ने एक बार कहा था, " इंसान की जरूरतों की संतुष्टि के लिए प्रकृति पर्याप्त है लेकिन आदमी के लालच के लिए पर्याप्त नहीं है।" वैश्वीकरण की इस भयंकर दौड़ में, दुनिया के देशों ने जरूरत और लालच के बीच के अंतर की समझ को खो दिया है। वे तेजी से भौतिकवाद के रेतीले गर्त में फंसते जा रहे हैं और इस तरह विभाजक रेखा को खींचने में असमर्थ हो रहा हैं। इस धुंधलके के परिणामस्वरुप उपभोक्तावादी अवधारणा अपव्यय को प्रदर्शित कर रही है जिससे माल और सेवाओं में बेतहाशा तरीके से विवेकहीन वृद्धि हुई है।


»  उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। किसी राष्ट्र की प्रतिस्पर्धा उत्पादकता वृद्धि के साथ जुड़ी होती है और प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार लाने के लिए राष्ट्र की क्षमता को परंपरागत आर्थिक मापदंड के अलावा पर्यावरणीय प्रदर्शन से मापा जाता है। सतत ऊर्जा और पर्यावरण के लिए हरित उत्पादकता̎ समय की आवश्यकता है।
 

Back to Top