प्रश्न:- हरित अर्थव्यवस्था से आप क्या समझते हैं ? अर्थव्यवस्था में हरित अर्थव्यवस्था घटक को कैसे

प्रश्न:- हरित अर्थव्यवस्था से आप क्या समझते हैं ? अर्थव्यवस्था में हरित अर्थव्यवस्था घटक को कैसे शामिल कर सकते हैं ?

 

ग्रीन इकोनॉमी यानी हरित अर्थव्यवस्था। इससे जरूरी विकास के साथ अपने पर्यावरण को भी संरक्षित रखा जा सकता है। जनकल्याण और सामाजिक सहभागिता में सुधार करते हुए उल्लेखनीय रूप से पर्यावरणीय खतरों और पारिस्थितिकीय दुर्लभता को कम करना ही ग्रीन इकोनॉमी है। इसे बढ़ावा देने वाले तरीकों और उत्पादों में निवेश करें।


भवन निर्माण- ऊर्जा ऑडिट द्वारा घर या ऑफिस की ऊर्जा लागतों में काफी बचत करना।
- घर में साज-सज्जा या लैंडस्केपिंग के लिए ऐसी चीजों का चयन करें जिनका पर्यावरण पर बहुत असर न हो।

 

मत्स्य उद्योग- मछली पकडऩे की अति से इनके भविष्य के भंडार में कमी का खतरा खड़ा कर दिया है। इसके लिए मछली पकडऩे के टिकाऊ तरीकों को बढ़ावा देना होगा।


वानिकी- कुल ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन का 20 फीसद केवल वनों के होते विनाश के चलते है।
- अगर वनों का टिकाऊ प्रबंधन किया जाए तो ये बिना पर्यावरण और जलवायु को नुकसान पहुंचाए लगातार समुदायों और पारिस्थितिकी तंत्र की मदद करते रहें।


परिवहन- कार पूलिंग या सार्वजनिक यातायात के इस्तेमाल से आप पर्यावरण पर पडऩे वाले असर और आर्थिक लागत दोनों को कम कर सकते हैं।


जल- उचित तरीके से जल के इस्तेमाल के माध्यम से इस अनमोल संसाधन का संरक्षण संभव है।


कृषि- उपभोक्ता ताकत का इस्तेमाल स्थानीय, कार्बनिक और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में करें।


ऊर्जा आपूर्ति- ऐसे उत्पाद या कारोबार में निवेश करें जो स्वच्छ और नवीकृत ऊर्जा के विकास को बढ़ावा देते हों।


पर्यटन- घर पर या घर से बाहर यात्रा के दौरान भी ग्रीन इकोनॉमी का समर्थन कर सकते हैं। स्थानीय खरीदें, कई लोगों के साथ यात्रा करें, पानी और ऊर्जा का सीमित इस्तेमाल करें।


अपशिष्ट- किसी भी वस्तु को फेंकने का सीधा सा मतलब है कि उस पदार्थ के पुर्नउपयोग का मौका गवां देना और लैंडफिल से

मीथेन नामक पर्यावरण के लिए खतरनाक गैस के उत्पादन को बढ़ावा देना।
- उपयुक्त पदार्थों के रिसाइकिल और खाद्य अपशिष्ट की कंपोस्ट खाद बनाकर हम लैंडफिल के असर को न केवल कम करते हैं बल्कि नए उत्पादों के निर्माण से अपने प्राकृतिक संसाधनों पर पडऩे वाले असर को भी कम करते हैं।


मैन्यूफैक्चरिंग और उद्योग- एक चतुर उपभोक्ता बनना। उस कारोबार को बढ़ावा देना जिसके पास टिकाऊ योजनाएं हों, इकोलेबल्स को इस्तेमाल करें, नवीकृत ऊर्जा में निवेश करें।
 

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