मनरेगा को मिली "आजीविका"

मनरेगा को मिली "आजीविका"

»  मनरेगा के युवाओं को भी आजीविका का लाभ मिलेगा।


»  आजीविका मिशन का दायरा सभी वर्ग के ग्रामीण बेरोजगार अकुशल युवाओं के लिए खोल दिया गया है। इसके लिए मिशन के मानकों को शिथिल किया गया है।


»  मनरेगा के युवा मजदूरों को प्रशिक्षण देकर कुशल बनाकर आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। मिशन में उत्तरी क्षेत्र के राज्यों को खास प्राथमिकता दिए जाने की योजना है।


»  महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) योजना के जॉब कार्डधारक युवकों को कुशल मजदूर बनाने के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें नौकरी दिलाने में मदद की जाएगी।


- एनआरएलएम के माध्यम से मनरेगा के मजदूरों को दिए जाने वाले प्रशिक्षण का दायित्व सिविल सोसाइटी संगठनों को दिया जाएगा।


»  इसके पहले चरण में जहां 184 ब्लॉकों का चयन किया गया था, उस सूची में अब चार राज्यों के 27 जिलों के 66 अतिरिक्त ब्लॉकों को जोड़ दिया गया है। इनमें उत्तर प्रदेश के तीन जिलों फैजाबाद, बस्ती और सिद्धार्थनगर के 11 ब्लॉक शामिल किए गए हैं।


»  चयनित ब्लॉकों में परियोजना को संचालित करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की होगी। परियोजना की निगरानी का ढांचा भी बनाना होगा, जिसके लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय के दिशानिर्देशों पर अमल करना होगा।


»  राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) पर कुल 4000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मिशन में केवल गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन (बीपीएल) करने वाले परिवारों को ही शामिल किया जाता है।


»  इस प्रावधान को शिथिल करते हुए इसे अब सभी वर्ग के ग्रामीण अकुशल युवाओं के लिए खोल दिया गया है। नक्सल प्रभावित 82 जिलों समेत 150 जिलों में महिला स्वयं सहायता समूहों को रियायती दर पर ऋण भी दिया जाएगा। ब्याज सब्सिडी का बोझ केंद्र सरकार उठाएगी।


»  देश के अन्य जिलों के महिला एसएचजी को भी इसी दर से कर्ज मिलेगा। उसमें केंद्र की हिस्सेदारी 75 फीसदी होगी। एनआरएलएम का प्रदर्शन दक्षिण भारत के चार राज्यों में बहुत उम्दा है। उत्तर व मध्य क्षेत्र में आजीविका मिशन को प्राथमिकता दी जाएगी।
 

Back to Top