1991 में भारत में आर्थिक सुधारों की शुरुआत और उसका परिप्रेक्ष्य" .........आज मेरी एक स्टूडेंट से इस बारे म

1991 में भारत में आर्थिक सुधारों की शुरुआत और उसका परिप्रेक्ष्य" .........आज मेरी एक स्टूडेंट से इस बारे में व्यापक चर्चा हुई उसी चर्चा को आप लोगों के साथ आगे बढ़ाते हुए....पढ़िए और पढ़ने का मजा उठाइये !

 

»  भारत ने आर्थिक सुधारों की शुरुआत सन 1991 में पी वी नरसिंह राव के प्रधानमंत्रित्व काल में की थी। उस वक्त मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे। उससे पिछली सरकारें जहां सुधार से दूर रही थीं, वहीं राव सरकार ने बाहरी, मौद्रिक, वित्तीय और राजकोषीय तमाम क्षेत्रों में सुधारों को अंजाम दिया।


»  नियंत्रण आधारित व्यवस्था से बाजार आधारित व्यवस्था की ओर किए गए इस प्रस्थान के दौरान ही सन 1991 में औद्योगिक लाइसेंसिंग का अंत हो गया।


»  गैर कृषि उत्पादों पर सीमा शुल्क की दरों को कम करने का क्रम शुरू हुआ और यह 300 फीसदी से घटते-घटते वर्ष 2007-08 में 10 फीसदी रह गई।


»  मार्च 1993 से अधिक उदार और एकीकृत विनिमय दर व्यवस्था लागू की गई और अगस्त 1994 से चालू खाते की परिवर्तनीयता आरंभ हुई।


»  प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को जुलाई 1991 से उदार बनाया गया। सांविधिक तरलता दर और नकद आरक्षित अनुपात (एसएलआर और सीआरआर) को कम करके वित्तीय दबाव कम किया गया। ब्याज दरों को विनियमित किया गया। पूंजी पर नियंत्रण के मसले को निपटाया गया और बाजार नियामक सेबी को सक्रिय बनाया गया।


»  वर्ष 1990-91 में केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा जीडीपी के 8.3 फीसदी के बराबर था जो दो सालों में घटकर 5.9 फीसदी पर आ गया। चीन के दिग्गज नेताओं के रूप में माओ के पतन और तंग श्याओ फिंग के उभार को सन 1979 में चीन में हुए आर्थिक सुधारों के संदर्भ में समझा जा सकता है।
 

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