सेवा क्षेत्र : आर्थिक विकास का इंजन

- अर्थव्यवस्था को मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है-कृषि, मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा। 

- मैन्यूफैक्चरिंग में भौतिक माल का उत्पादन गिना जाता है-जैसे पंखा, कम्प्यूटर अथवा कपड़े का। 

- सेवा क्षेत्र में टेलीवीजन प्रोग्राम, डाक्टर, पर्यटन आदि गिने जाते हैं। इस क्षेत्र में भौतिक माल का उत्पादन नहीं होता। डाक्टर द्वारा दी गई सलाह सेवा में गिनी जाती है जबकि दुकानदार द्वारा बेची गई दवा मैन्यूफैक्चरिंग में और दवा बनाने के लिये उत्पादित जड़ी-बूटियां कृषि क्षेत्र में आती हैं।

- अर्थव्यवस्था में कृषि का हिस्सा अपने यहां लगातार घटता जा रहा है। विकसित देशों में यह आज घटकर एक प्रतिशत से भी कम रह गया है। इसलिये कृषि को विकास का इंजन बनाना दूभर होगा।

- मैन्यूफैक्चरिंग में भौतिक माल का उत्पादन होता है। यहां समस्या है कि एक सीमा के बाद मनुष्य माल की खपत नहीं कर पाता है। तुलना में सेवाओं की खपत ज्यादा हो सकती है। 

- जैसे मोबाइल फोन में आप हर घंटे नया गेम लोड कर सकते हैं अथवा अंतरिक्ष में पर्यटन की टिकट खरीद सकते हैं। नागरिकों की आय में वृद्धि के साथ-साथ माल की खपत में वृद्धि कम और सेवाओं की खपत उत्तरोत्तर बढ़ती ही जाती है।

- अत: देखा जाता है कि अमीर देशों में अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का हिस्सा 80 से 90 प्रतिशत होता है।

- हम भी इसी दिशा में चल पड़े हैं। 1991 में अपने देश में मैन्यूफैक्चरिंग और सेवाओं दोनों का हिस्सा 24-24 प्रतिशत था। 

- 1991 से 2013 तक मैन्यूफैक्चरिंग का हिस्सा वही 24 प्रतिशत पर टिका रहा है। तुलना में सेवा क्षेत्र का हिस्सा 47 प्रतिशत पर पहुंच गया है। इसका अर्थ यह नहीं कि मैन्यूफैक्चरिंग में वृद्धि नहीं हो रही है। नये कारखाने स्थापित हो रहे हैं। परन्तु देश की अर्थव्यवस्था में यदि 7 प्रतिशत की वृद्धि हर वर्ष हो रही है तो मैन्यूफैक्चरिंग में भी 7 प्रतिशत की ही होने से मैन्यूफैक्चरिंग का हिस्सा स्थिर है।

- सेवा क्षेत्र में वृद्धि अर्थव्यवस्था की चाल से दोगुनी स्पीड से होने से इस क्षेत्र का हिस्सा बढ़ रहा है। तद‍्नुसार सेवा का हिस्सा बढ़ रहा है और कृषि का हिस्सा घट रहा है। निष्कर्ष निकलता है कि अपने देश में ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र में तीव्र विकास हो रहा है जबकि मैन्यूफैक्चरिंग में ठहराव आ रहा है। अत: हमें मैन्यूफैक्चरिंग के उगते सूरज को पकड़ना चाहिये।

- दूसरी समस्या प्रतिस्पर्धा की है। वर्तमान में चीन का माल सस्ता पड़ रहा है। वहां उद्योगों से पर्यावरण का मूल्य वसूल नहीं किया जा रहा है। कारखाने को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाना पड़ा और माल की उत्पादन लागत कम आयी।

- लेकिन हमारे कारखाने को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाना पड़ता है और हमारी लागत ज्यादा आती है।

- तीसरी समस्या रोजगार की क्वालिटी की है। मैन्यूफैक्चरिंग में 80 प्रतिशत रोजगार क्लास 4 के होते हैं जबकि आईटी कम्पनी में 80 प्रतिशत इंजीनियरों के। 

- मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देकर हम अपने देशवासियों को क्लास 4 के रोजगार ही उपलब्ध करा पायेंगे। 

- इन सभी कारणों से मैन्यूफैक्चरिंग के स्थान पर सेवा क्षेत्र को बढ़ावा देना उचित दिखता है।

- प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं के हुनर में सुधार को प्राथमिकता दी है। यह कदम भी सेवा क्षेत्र में मेल खाता है।

- साफ्टवेयर कम्पनी के लिये भूमि अधिग्रहण की जरूरत नहीं होती।

- दुनिया में एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद की जरूरत लगातार बढ़ती जा रही है। सरकार को चाहिये कि हर जिले में विदेशी भाषा संस्था स्थापित करे। 

- ऐसा करने से अनुवाद का काम हमें मिल सकता है।

- अपने देश में स्वास्थ्य पर्यटन का विकास सहज ही हो रहा है। जिस आपरेशन को अमेरिका में 50 लाख रुपये लगते हैं वह भारत में 5 लाख में कराया जा सकता है।  

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