दूसरी हरित क्रांति और उसका एजेंडा

- पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, असम, छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे राज्यों में दूसरी हरितक्रांति शुरू हो चुकी है। 

- शुरुआती वर्षों में इसके नतीजे भी उत्साहजनक रहे हैं। 

- मक्का, धान और गेहूं की फसलों की उत्पादकता में भारी वृद्धि हुई है। 

- अब यहां प्रोटीन आधारित फसलों यानी दलहन की खेती को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।

- यहां की मिट्टी की उर्वरता और नमी को लेकर कृषि वैज्ञानिक काफी संतुष्ट हैं।

- लेकिन इन राज्यों में खेतों के आकार छोटे के चलते समुचित कृषि प्रौद्योगिकी का अभाव है।

-इन राज्यों में छोटी जोत के किसानों की संख्या 90 फीसद से भी अधिक है। लेकिन उत्पादकता की संभावना को देखते हुए यहां दूसरी हरित क्रांति शुरू की गई है।

- खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने के मद्देनजर सरकार ने आम बजट में दूसरी हरित क्रांति को और धारदार बनाने की घोषणा की है। इसमें प्रोटीन क्रांति को खास तवज्जो दी जाएगी। 

- अनाज की बंपर पैदावार के बावजूद देश में दलहन, अंडा, मीट और मछली की भारी कमी है। दालों की कमी को आयात से पूरा करना पड़ता है।खेती की विकास दर को चार फीसद के स्तर पर कायम रखने के लिए दूसरी हरित क्रांति वाले राज्यों की खेती में आधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग बढ़ाया जाएगा। 

- फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए संतुलित खाद, कीटनाशक और सिंचाई के साथ खेती की आधुनिक तकनीक पर खास जोर दिया जाएगा। पूर्वी राज्यों में जहां दूसरी हरित क्रांति का बिगुल बज चुका है, उन राज्यों में प्रोटीनयुक्त फसलों यानी दलहन के साथ कुक्कुट, पशुधन और मत्स्य पालन की अपार संभावनाएं हैं। इसे लेकर सरकार भी उत्साहित है।

- सरकार का जोर मत्स्य पालन (नीली क्रांति) के साथ प्रोटीन के लिए महत्वपूर्ण इसी तरह पशुधन विकास है। 

- देसी नस्ल के पशुओं के विकास के साथ आधुनिक मत्स्य पालन के लिए पचास-पचास करोड़ रुपये की लागत से प्रजनन योजना शुरू करने का प्रावधान किया गया है।  

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