कंप्यूटर की तरह असेंबल होंगे किडनी, लीवर

- किडनी, लीवर जैसा शरीर का कोई अंग अगर खराब हो जाए तो इंसान का न सिर्फ जीना दुश्वार हो जाता है, बल्कि प्रत्यारोपण नहीं होने पर मौत भी बेहद करीब आ जाती है। प्रत्यारोपण के लिए समय पर अंग मिल पाना भी किसी वरदान से कम नहीं होता।

 

- अब वैज्ञानिक उस मुकाम की ओर बढ़ रहे हैं, जहां से तकनीक के जरिये इन अंगों को निर्मित किए जाने की संभावनाएं नजर आ रही हैं। इस नई तकनीक के तहत किडनी, लीवर जैसे मानव अंगों को इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की असेंबलिंग करने जैसे तरीके से बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

 

- संबंध में एक हालिया शोध के मुताबिक "बायो पी-3" नाम की डिवाइस के जरिए वैज्ञानिकों को मानव अंगों के ऊतकों की बड़ी-बड़ी संरचनाएं बनाने में सफलता मिली है।

 

- यह संरचनाएं छोटे जीवित ऊतकों से विकसित की गईं। शोधकर्ताओं के मुताबिक भविष्य में "बायो पी-3" का उन्नत वर्जन से जरिए लीवर, किडनी या पैंक्रियाज (अग्नाशय) जैसे पूरे अंगों को बनाया जा सकेगा।

 

कैसे काम करता है बायो पी-3 - टिश्यू इंजीनियरिग पार्ट सी जर्नल में प्रकाशित हुए शोध के मुताबिक बायो पिक-3 डिवाइस पिक, प्लेस एंड परफ्यूज यानी चुनकर उठाना, रखना और विकसित करने की कार्यविधि पर केंद्रित है। यह एक प्लास्टिक बॉक्स की तरह नजर आता है, जो दो भागों में बंटा है।

 

- एक तरफ जीवित ऊतक संरचनाओं को रखा जाता है और दूसरा हिस्सा वह होता है जहां बड़ी संरचनाओं का निर्माण किया जाना होता है। बॉक्स में नाक की तरह निकले हुए हिस्से में कुछ पाइप जुड़े होते हैं जिन्हें एक विशेष पंप के जरिये चूसने जैसी प्रक्रिया के लिए उपयोग किया जाता है।

 

-- इस प्रक्रिया से ऊतकों को बिना नुकसान पहुंचाए एक स्थान से उठाकर लक्षित स्थान पर ले जाया जाता है। इस तरह से नई संरचना का निर्माण किया जाता है।

 

डिवाइस से बना मधुमक्खी का छत्ता:- - वैज्ञानिकों से इन डिवाइस से अब तक एक 16 डोनट रिग्स वाली संरचना और एक मधुमक्खियों के छत्ते जैसी संरचना निर्मित की है। मधुमक्खी के छत्ते की संरचना की हर परत करीब 2,50,000 कोशिकाओं से बनी है। हालांकि किसी मानव अंग को बनाने के लिए इतनी कोशिकाएं काफी कम हैं। किसी वयस्क व्यक्ति के लीवर जैसे अंगों में 100 अरब कोशिकाएं होती हैं।

 

- वैज्ञानिक टीम का कहना है कि निर्मित की गई संरचनाओं में कोशिकाओं का घनत्व मानव अंगों के बराबर ही है, इसलिए बड़े अंग बनाने का लक्ष्य निश्चित रूप से हासिल किया जा सकता है। इस विधि से वैज्ञानिकों ने एच35 लीवर सेल्स, केजीएन ओवेरियन सेल्स और एमसीएफ-7 स्तन कैंसर सहित विभिन्न तरह की कोशिकाओं की संरचनाएं निर्मित की हैं।  

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