भारत विश्व में सबसे युवा देशों में से एक है जहां 58 प्रतिशत जनसंख्या 29 साल की उम्र से कम है।

»  इसी वजह से रोजगार सृजन, विशेषकर युवा, हमारी रोजगार नीति के मुख्‍य बिन्‍दु हैं। बेहतर रोजगार सृजन का मतलब कार्यबल के कौशल को मांग आधारित व्यवसायिक प्रशिक्षण और बेहतर एप्रेंटिसशिप के जरिए कारगर बनाना है ताकि हमारे कार्यबल की रोजगार पाने की संभावनाओं को बढ़ाया जा सके। 

»  इससे प्रधानमंत्री के 'मेक इन इंडि़या,' 'स्किल इंडि़या' जैसी मुहिमों को साकार करने में भी मदद मिलेगी। इस दिशा में उठाए गए कदम निम्‍न हैं :

 

 एप्रेंटिस एक्‍ट में संशोधन I संसद ने एप्रेंटिस एक्‍ट 1961 के संशोधन के लिए एक व्‍यापक विधेयक को मंजूरी दे दी है। यह विधेयक लोक सभा और राज्‍य सभा से पारित हो चुका है।

II सीटों के व्‍यवसाय-वार नियमन को कुल श्रमिकों के अधिकतम और न्‍यूनतम प्रतिशत से बदल दिया गया है। इसकी वजह से अब एप्रेंटिस किसी भी व्‍यवसाय में कार्य कर सकेंगे।

III उद्योग अब एप्रेंटिस को उन वैकल्पिक व्‍यवसायों में भी लगा सकते है जो मान्‍यता प्राप्‍त नहीं है हालांकि इसके लिए प्रवेश स्‍तर की शिक्षा और पाठ्यक्रम का होना जरूरी है।

IV डिप्‍लोमा और डिग्री के स्‍तर पर गैर इंजीनियरिंग व्‍यवसायों का दायरा बढ़ाया गया है।

V दंड अब सिर्फ जुर्माने के रूप में।

VI मूल प्रशिक्षण को अपनी पसन्‍द के संस्‍थान को आउटसोर्स करने को मंजूरी।

VII एप्रेंटिस दूसरे राज्‍यों से भी हो सकते हैं।

 

एप्रेंटिस प्रोत्‍साहन योजना की शुरूआत :

I 16 अक्‍टूबर, 2014 को उद्घाटन।

II 346 करोड़ रुपये की राशि के साथ सरकार अगले ढाई वर्षों में छात्रवृत्ति की 50 प्रतिशत भार उठाते हुए एक लाख एप्रेंटिसों की मदद करेगी।

III वर्तमान में 2.9 लाख एप्रेंटिस के मुकाबले अगले कुछ वर्षों में 20 लाख अपरेंटिस तैयार करने का लक्ष्‍य रखा गया है।

IV व्‍यवसाय एप्रेंटिसों के लिए छात्रवृत्ति की दर को बढ़ाया गया और उसे अधिसूचित कर दिया गया है। प्रति माह छात्रवृत्ति के न्‍यूनतम दर को अर्ध-प्रशिक्षित श्रमिकों के न्‍यूनतम वेतनमान के सूचकांक से जोड़ा गया है। 

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