राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अधीन उप-योजना

ये उप-योजनाएं और उनके लिए आवंटन निम्नानुसार हैं:-

पूर्वोत्तर क्षेत्र में हरित क्रांति लानाः- असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ की चावल आधारित फसल प्रणाली मे सुधार के उद्देश्य से वर्ष 2010-11 में यह कार्यक्रम शुरू किया गया था।

 

सब्जी क्षेत्रों पर आधारित पहलः सब्जियों की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए इसकी उत्पादकता और बाजार संपर्क बढ़ाने का प्रयास किया गया। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए एक कारगर आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करना आवश्यक था, ताकि अपेक्षाकृत कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण सब्जियां उपलब्ध हो सके।

 

 राष्ट्रीय प्रोटीन पूरक मिशनः- चुनिंदा ब्लॉकों में पशुधन विकास, दूध उत्पादन, सूअर पालन, बकरी पालन और मछली पालन के माध्यम से पशु आधारित प्रोटीन के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 2011-12 के दौरान 300 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ राष्ट्रीय प्रोटीन पूरक मिशन की शुरुआत की गई।

 

 केसर मिशनः भारत सरकार की ओर से 4 वर्षों के लिए 288.06 करोड़ रुपए की बजटीय सहायता से 2010-11 में यह योजना शुरू की गई थी। इस मिशन का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में केसर उत्पादन का आर्थिक पुनर्जीवन करना है।

 

विदर्भ सघन सिंचाई विकास कार्यक्रमः- इस योजना की शुरूआत वर्ष 2012-13 में की गई। इसका उद्देश्य संरक्षित सिंचाई के दायरे में और भी अधिक कृषि भूमि को लाना था।

 

फसल विविधीकरणः- मूल रूप से हरित क्रांति वाले राज्यों के सामने फसल उत्पादन का स्तर कायम रखने और जल संसाधनों का अत्यधिक दोहन की समस्याएं हैं। इसका समाधान फसलों के विविधीकरण के रुप में देखा जा रहा है। फसल विविधीकरण कार्यक्रम शुरू करने के लिए वर्ष 2013-14 में 500 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया, ताकि प्रौद्योगिकीय खोज को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों को फसलों के विकल्पों को चुनने की दिशा में प्रोत्साहित किया जा सके।  

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