बुजुर्गों की देखभाल जरूरी

- देश में बुजुर्ग व्यक्तियों की संख्या 10 करोड़ हैं। 2030 तक इसके बढ़कर 20 करोड़ होने की संभावना है। मेडिकल साइंस में प्रगति और दवाइयों तक आसानी से उपलब्धता के चलते यह संख्या वक्त गुजरने के साथ बढ़ेगी। हालांकि इसके बावजूद यह नहीं कहा जा सकता कि हमारे देश के वृद्ध स्वस्थ जीवन भी गुजार रहे हैं।

 

-*** कई कुपोषण, गठिया और मोतियाबिंद का शिकार हैं जिनकी वजह से वे काम करने और चलने-फिरने में असमर्थ हो गए हैं। लिहाजा सामाजिक संपर्क का दायरा भी सिकुड़ गया है। 

 

- मौजूदा दौर के बदलते पारिवारिक मूल्यों और एकल परिवारों के बढ़ते चलन और काम की तलाश में युवाओं के बाहर जाने के चलते करीब तीन करोड़ बुजुर्ग एकाकी जीवन जीने को मजबूर हैं। पांच लाख को भूखे पेट सोना पड़ता है 1.2 करोड़ मोतियाबिंद का इलाज नहीं हो पाने के कारण अंधे हो जाते हैं।

 

- बढ़ती महंगाई और अपने एकल परिवार की जरूरतों को पूरा करने के कारण लाखों परिवार अपने बुजुर्गों का इलाज और स्वास्थ्य संबंधी देखभाल करने में असमर्थ हैं। इस मसले पर लगभग कोई जन स्वास्थ्य ढांचा नहीं है और सरकार ने यह काम निजी और कारपोरेट अस्पतालों के जिम्मे छोड़ रखा है।

 

- इन निजी अस्पतालों में एक दिन भर्ती कराने की फीस 25 हजार रुपये से अधिक तक होती है। ऐसे में 90 प्रतिशत से भी ज्यादा बुजुर्ग इसका लाभ उठाने में सामथ्र्यवान नहीं हैं।

 

- अधिकांश देशों में बढ़ती आबादी के संदर्भ में देखने पर पता चलता है कि स्वास्थ्य सेवा पर जीडीपी के प्रतिशत के रूप में बेहद मामूली खर्च किया जाता है। 

 

- ब्रिक्स देशों में यदि देखा जाए तो भारत में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सार्वजनिक और निजी खर्च जीडीपी का महज 3.9 प्रतिशत है जोकि सबसे कम है। इसकी तुलना में ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में 8.5-9.0 प्रतिशत तक इस मद में खर्च किया जाता है।

 

- देश में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में मौजूदा सरकारी खर्च जीडीपी का केवल 1.2 प्रतिशत है। 2017 तक इसको बढ़ाकर 2.5 प्रतिशत और 2022 तक तीन प्रतिशत किए जाने की योजना है। इसको तत्काल रूप से बढ़ाए जाने की जरूरत है।

 

- इस दिशा में आगे बढ़ते हुए सबसे पहले सरकार को बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवा ढांचा विकसित करने के लिए तत्काल निवेश करना चाहिए। सरकार द्वारा उनको यूनिवर्सल स्वास्थ्य बीमा दिया जाना चाहिए। 

 

- जिनमें अत्यंत नाजुक स्थितियों में भी अस्पताल में भर्ती किए जाने की व्यवस्था होनी चाहिए। केंद्रीय बजट में स्वास्थ्य मद में किए जाने वाले आवंटन में बुजुर्गों के स्वास्थ्य के संबंध में अलग से आवंटन किया जाना चाहिए।

 

- सरकार को आगे आना चाहिए क्योंकि बड़ी संख्या में बीमार बुजुर्ग आबादी की वजह से अर्थव्यवस्था पर पडऩे वाले नुकसान के कारण भारत की विकास रफ्तार धीमी पड़ सकती है।  

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