राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग कानून नहीं होगा तत्काल लागू

- उच्च न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति का नया कानून तत्काल लागू किए जाने की संभावना नहीं है क्योंकि उसके लिए पहले दो प्रख्यात हस्तियों को नामांकित करना होगा, जो प्रस्तावित उच्च स्तरीय आयोग के हिस्सा होंगे। इसके बाद ही नियुक्ति की पुरानी कॉलेजियम प्रणाली को समाप्त करने की अधिसूचना जारी हो सकेगी।

 

- कॉलेजियम प्रणाली में पारदर्शिता तथा निष्पक्षता पर सवाल उठने के बाद सरकार ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) बनाने का कानून बनाया है। 

 

- प्रस्तावित आयोग के लिए एक ऐसी जगह को भी अंतिम रूप देना होगा, जहां से यह काम करेगा। 

 

- राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पिछले हफ्ते एनजेएसी विधेयक और संलग्न संवैधानिक संशोधन विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी थी।

 

- संविधान में शामिल किए गए नए अनुच्छेद 124ए के अनुसार प्रधानमंत्री, प्रधान न्यायाधीश और लोकसभा में नेता विपक्ष या नेता विपक्ष न होने पर सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता वाली समिति द्वारा आयोग के सदस्य के रूप में दो प्रमुख हस्तियों को नामांकित किया जाएगा।

 

"कौन होंगी वे प्रमुख हस्तियां" :- - प्रमुख हस्तियों में से एक व्यक्ति अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक या महिला वर्ग से शामिल किया जाएगा। साथ ही ये प्रमुख व्यक्ति तीन साल की अवधि के लिए नामांकित होंगे और उन्हें पुनः नामांकित नहीं किया जाएगा।

 

- एनजेएसी की अगुवाई प्रधान न्यायाधीश करेंगे। शीर्ष अदालत के दो वरिष्ठतम न्यायाधीश, दो प्रख्यात हस्तियां और कानून मंत्री उच्चस्तरीय पैनल के सदस्य होंगे। कानून मंत्रालय के सचिव इसके संयोजक होंगे।

 

धारा के अनुरूप नियम बनना शुरू:- - प्रख्यात हस्तियों के नाम तय हो चुके हैं और कानून मंत्रालय प्रस्तावित इकाई के लिए एनजेएसी कानून की धारा 11 के अनुरूप नियम बनाना शुरू करेगा। आयोग अपने लिए खुद नियमन तैयार करेगा, जैसा कि कानून की धारा 12 में प्रावधान किया गया है।  

Back to Top