कौशल विकास

»  दुनिया में सर्वाधिक कार्यशील आबादी का पूरा लाभ तभी संभव है जब हर हाथ हुनर और हर दिमाग कौशल युक्त हों। भारत ने इस चिंता को ध्यान में रखते हुए कौशल विकास कार्यक्रम में तेजी दिखाई है। 

 

»  सरकार के थिंक टैंक इंस्टीट्यूट ऑफ अप्लाइड मैनपॉवर रिसर्च (आइएएमआर) के अनुसार 2022 तक 24.9 से 29.0 करोड़ लोगों को कौशल प्रदान करने की जरूरत होगी। 

 

»  देश के सामने कौशल विकास की बड़ी चुनौती है। अगले दशक तक हर साल करीब 1.2 करोड़ लोग देश की श्रमशक्ति में शामिल होंगे। इसके विपरीत देश की कुल प्रशिक्षण क्षमता 43 लाख है। 

 

»  लिहाजा करीब 64 फीसद लोग हर साल सामान्य कौशल विकास से दूर रह सकते हैं। व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में हमारे यहां प्रति वर्ष 55 लाख छात्रों का नामांकन होता है जबकि चीन में यह आंकड़ा 9 करोड़ और अमेरिका में 1.13 करोड़ है।

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