एशिया आधारभूत संरचना निवेश बैंक

नवीन वैश्विक परिदृश्य में एशिया वैश्विक विकास का इंजन बनता जा रहा है। वैश्विक आर्थिक गतिविधियों का केंद्र पश्चिम से पूर्व की ओर खिसक रहा है। निवेश, विकास के इंजन में ईंधन का कार्य   करता है। विकास की गति को बरकरार रखने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में निवेश विशेषकर आधारभूत अवसंरचना क्षेत्र में निवेश अति आवश्यक है। एक अनुमान के अनुसार अब से 2020 तक के बीच एशिया को 800 बिलियन डॉलर वार्षिक निवेश की आवश्यकता है। अभी तक एशियाई देशों की निर्भरता‘अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष’ और विश्व बैंक पर थी और ये दोनों ही संस्थान पश्चिमी देशों की प्रभुत्व वाले हैं। इसके अलावा जापान के प्रभुत्व वाला एशिया विकास बैंक भी एशिया के निवेश आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु अपर्याप्त था। परिणामतः चीन के द्वारा भारत एवं अन्य 19 एशियाई देशों के सहयोग से ‘एशिया आधारभूत संरचना निवेश बैंक’ की शुरुआत की गई जो कि एशियाई निवेश की मांग को पूरा कर सके। ·      

 

24 अक्टूबर, 2014 को एशिया आधारभूत संरचना निवेश बैंक हेतु हस्ताक्षर समारोह का आयोजन बीजिंग में किया गया। ·       एशिया आधारभूत संरचना निवेश बैंक का मुख्यालय चीन के‘बीजिंग’ में होगा। · इस बैंक की अधिकृत पूंजी 100 बिलियन डॉलर होगी। इसमें लगभग 50 बिलियन डॉलर का सहयोग चीन का होगा। · बैंक को 2015 से कार्य प्रारंभ करने की संभावना है। ·       भारत इस बैंक में चीन के पश्चात दूसरा सबसे बड़ा अंशधारक होगा। ·  इस बैंक के भारत और चीन के अलावा अन्य 19 संस्थापक सदस्य हैं-बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, पाकिस्तान, ब्रुनेई, कंबोडिया, कजाख्स्तान, कुवैत, लाओस, मलेशिया, मंगोलिया, म्यांमार, ओमान, फिलीपींस, कतर, सिंगापुर, थाईलैंड, उज्बेकिस्तान और वियतनाम। ·    

 

 पश्चिमी देशों के विशेषकर अमेरिका के दबाव के कारण तीन देशों ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और दक्षिण कोरिया ने ‘एशिया आधारभूत संरचना विकास बैंक’में भागीदार होने से इंकार कर दिया। ज्ञातव्य है कि अमेरिकी नेतृत्व में पश्चिमी देश इस बैंक की स्थापना के विरुद्ध हैं। ·    

 

  भारत ने पश्चिमी देशों की नाराजगी को दरकिनार करके इस बैंक में शामिल होने का निर्णय कर अपनी स्वतंत्र वैदेशिक नीति का परिचय दिया। · यह बैंक एशिया के विकास हेतु आवश्यक निवेश की मात्रा और विभिन्न संस्थाओं द्वारा उपलब्ध निवेश के मध्य के अंतराल को भरेगा।  

Back to Top