विश्व में खाद्य असुरक्षा की स्थिति-2014

संयुक्त राष्ट्र संघ का विशिष्ट अभिकरण ‘खाद्य एवं कृषि संगठन’ (Food and Agriculture Organization-FAO) जिसका मुख्यालय रोम में है, आई.एफ.ए.डी. (International Fund for Agricultural Development) और डब्ल्यूएफपी (World Food Programme) के साथ संयुक्त रूप से ‘विश्व में खाद्य असुरक्षा की स्थिति’ (SOFI) रिपोर्ट हाल ही में प्रकाशित की। ‘खाद्य एवं कृषि संगठन’ (FAO) भुखमरी को समाप्त करने के वैश्विक प्रयासों का नेतृत्व करता है। इसके अलावा यह कृषि उत्पादन, वानिकी एवं कृषि विपणन संबंधी विषयों का अध्ययन तथा इन क्षेत्रों में विभिन्न देशों के अधिकारियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था भी करता है। विकासशील देशों में कृषि क्षेत्र के विकास में ‘खाद्य एवं कृषि संगठन’ (FAO) की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। ·  

 

 23 सितंबर, 2014 को विश्व में खाद्य असुरक्षा की स्थिति (The State Of Food Insecurity in the World : SOFI) रिपोर्ट-2014 प्रकाशित की गई। ·विश्व में खाद्य असुरक्षा की स्थिति (SOFI) रिपोर्ट का उद्देश्य ‘सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों’(Millennium Development Goals) के संबंध में खाद्य सुरक्षा संबंधी प्रगति का आकलन करना है। ·इस रिपोर्ट के अनुसार अभी भी विश्व में 805 मिलियन लोग दीर्घकालिक अल्पपोषण (Chronically Undernourished) से ग्रस्त हैं। गत वर्ष (2009-11) में यह संख्या 840.5 मिलियन थी। · इन 805 मिलियन अल्पपोषित लोगों में 791 मिलियन लोग (लगभग 98%) विकासशील देशों में निवास करते हैं। ·    

 

   विकासशील देशों में वर्ष 1990 की तुलना में भुखमरी के शिकार लोगों की संख्या में अब तक (2014) 20.5% की गिरावट आई है। 2014 में विकासशील देशों में 13.5% लोग भुखमरी के शिकार हैं। · सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों (Millennium Development Goals) में वर्ष 2015 तक विकासशील देशों में भुखमरी के शिकार लोगों का प्रतिशत घटाकर 11.7% करने का लक्ष्य रखा गया है। ·इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में भुखमरी के शिकार लोगों की संख्या 190.7 मिलियन है जो कुल जनसंख्या का 15.2% है। संख्या की दृष्टि से यह सर्वाधिक है। · क्षेत्रीय आधार पर प्रतिशत की दृष्टि से सर्वाधिक भुखमरी के शिकार लोग अफ्रीका (23.8%) में हैं। संख्या के आधार पर सर्वाधिक लोग एशिया पैसिफिक में (504 मिलियन) हैं जो यहां की जनसंख्या का 12.9% है। ·    

 

 सबसे कम भुखमरी के शिकार (6.3 मिलियन) लोग एवं कुल जनसंख्या में भुखमरी का न्यूनतम प्रतिशत ‘यूरोप एवं मध्य एशिया क्षेत्र’ में है। सहस्राब्दि विकास लक्ष्य (Millennium Development Goals-MDG) वर्ष 2000 में संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य देशों के ‘सहस्राब्दि सम्मेलन’ (Millennium Summit) में 8 लक्ष्य निर्धारित किए गए। इन्हें ‘सहस्राब्दि विकास लक्ष्य’ (Millennium Development Goals-MDG) कहा जाता है। लक्ष्य – 01 - वर्ष 2015 तक वर्ष 1990 की तुलना में अल्पपोषित लोगों की संख्या आधा करना। लक्ष्य – 02 – वर्ष 2015 तक सभी विकासशील देशों में ‘सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा’ (Universal Primary Education) हासिल करना। लक्ष्य – 03 – वर्ष 2015 तक ‘लैंगिक असमानता’ (Gender Disparity) को समाप्त करना। लक्ष्य – 04 – वर्ष 2015 तक वर्ष 1990 की तुलना में ‘शिशु मृत्यु दर (Child Mortality Rate) को ‘एक-तिहाई’ करना। लक्ष्य – 05 – वर्ष 2015 तक वर्ष 1990 की तुलना में ‘मातृ मृत्यु दर’ (Maternal Mortality) को ‘एक-तिहाई’ करना। लक्ष्य – 06 – वर्ष 2015 तक एचआईवी (HIV), मलेरिया के फैलाव पर पूर्ण रोक। लक्ष्य – 07 – वर्ष 2015 तक ‘पर्यावरणीय संपोषणीयता’ (Environmental Sustainability) सुनिश्चित करना।  

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