जल संरक्षण

- देश की आबादी कुल वैश्विक आबादी का 18 प्रतिशत से अधिक है लेकिन इसके पास नवीकरणीय जल स्रोतों का केवल चार प्रतिशत हिस्सा है। 

 

- ऐसे में इस दुर्लभ प्राकृतिक स्रोत की सामुदायिक हिस्सेदारी और वैकल्पिक स्रोत के जरिये सुरक्षा की जा सकती है।

 

- जल का उपयोग करने वाली एसोसिएशन (डब्ल्यूयूए) और स्थानीय निकायों ग्राम पंचायत, नगरपालिकाओं को जल के आधारभूत ढांचे/सुविधाओं के प्रबंधन, रखरखाव और ऑपरेशन के स्तर पर जोडऩे की जरूरत है ताकि भविष्य में इनका पूरी तरह से हस्तांतरण सामुदायिक संगठनों/स्थानीय निकायों को किया जा सके।

 

- जल और भूमि स्रोतों के प्रबंधन के लिए स्थानीय स्तर पर कुल सामुदायिक भागीदारी के लिए वर्तमान में 6.7 लाख ऐसे संगठनों की जरूरत है। 2020 तक ऐसे 7.1 लाख सामुदायिक संगठनों की जरूरत होगी। 

 

- देश की राष्ट्रीय जल नीति में डब्ल्यूयूए को निर्णय लेने और प्रोजेक्टों की योजना निर्माण की प्रक्रिया में शामिल करते हुए उनको वैधानिक शक्तियां प्रदान करने की वकालत की गई है। 

 

- इसमें पानी के बिल के एक हिस्से को एकत्र करने के अधिकार समेत उसको रखने, आवंटित जल के प्रबंधन और वितरण प्रणाली के रख-रखाव का अधिकार शामिल है। 

 

- इसके अलावा भूमिगत जल के घटते स्रोतों को बरकरार रखने के लिए जरूरी है कि मानसूनी बारिश के जल को संरक्षित रखा जाए और उसे रिचार्ज किया जाये। 

 

- व्यवहारिक रूप से करीब 214 अरब घन मीटर (बीसीएम) भूजल का भंडारण किया जा सकता है। उसमें से 160 बीसीएम को दोबारा प्राप्त किया जा सकता है।  

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