क्या है मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी यानी एमएसएफ?

- यह कॉन्सेप्ट 9 मई 2011 को लागू हुआ। इसमें सभी शेड्यूल कमर्शल बैंक एक रात के लिए अपने कुल डिपॉजिट का 1 फीसदी तक लोन ले सकते हैं।

- बैंकों को यह सुविधा शनिवार को छोड़कर सभी वर्किंग डे में मिलती है। इंटरेस्ट रेट रेपो से 1 फीसदी ऊपर होता है। रेपो वह रेट है, जिस पर बैंक आरबीआई से शॉर्ट टर्म लोन ले सकते हैं।

- एमएसएफ में बैंक कम से कम 1 करोड़ रुपए ले सकते हैं। उससे ज्यादा लोन 1 करोड़ रुपए के मल्टीपल में लिया जा सकता है। इस फैसिलिटी लेने के लिए सरकारी सिक्यॉरिटी की जमानत पर 5 फीसदी और स्टेट डेवलपमेंट लोन पर 10 फीसदी का मार्जिन रखना पड़ता है। मतलब 100 रुपए के लोन के लिए बैंक को 105 रुपए मूल्य की सरकारी सिक्यॉरिटी और 110 रुपए की स्टेट डेवलपमेंट लोन की जमानत देनी होगी।

 

=>एमएसएफ से क्या फायदा होता है?

- इंटरबैंक ओवरनाइट मार्केट में वोलैटिलिटी पर अंकुश लगाने के लिए बैंकों को यह फैसिलिटी दी गई थी। एमएसएफ से आरबीआई ने पॉलिसी रेट में 2 फीसदी का कॉरिडोर बनाया। यह रेपो से 1 फीसदी ज्यादा होता है और रेपो से 1 फीसदी कम रिवर्स रेपो रेट होता है।  

Back to Top