गैर सरकारी संगठन और उनकी अपारदर्शी कार्यप्रणाली

»  सिर्फ दस फीसद गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ही राज्य सरकारों को आय और खर्च का ब्योरा दे रहे हैं। सुप्रीमकोर्ट में दाखिल सीबीआई के ताजा हलफनामे से इस बात का पता चलता है।

 

»  हलफनामे के मुताबिक 20 राज्यों में कुल 22 लाख 39 हजार 971 रजिस्टर्ड एनजीओ हैं जिनमें सिर्फ 2 लाख 23 हजार 428 ने ही रजिस्ट्रेशन करने वाली संस्था को अपनी आमदनी और खर्च का ब्योरा दिया है।

 

»  सीबीआई ने ये हलफनामा सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर दाखिल किया है। 

 

»  कोर्ट ने सीबीआई से कहा था कि वह बताए कि देश भर में कितने एनजीओ सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत हैं और यह भी बताए कि कितने एनजीओ रजिस्टर्ड संस्था के पास अपनी आमदनी और खर्च का ब्योरा व बैलेंस शीट दे रहे हैं। कोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए सीबीआई ने यह ब्योरा दाखिल किया है।

 

»  सीबीआई ने बताया है कि उसने सभी राज्यों से सूचना मांगी थी जिसमें से 20 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों से सूचना मिली है। एजेंसी ने बाकी के बारे में जानकारी देने के लिए तीन महीने का समय मांगा है। सीबीआई ने कहा है कि 6 केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 5684 एनजीओ रजिस्टर्ड हैं जिनमें से सिर्फ 50 ने ही अपनी आमदनी और खर्च का ब्योरा दिया है।

 

»  केंद्र शासित प्रदेशों के अलावा 20 राज्यों का भी ब्योरा कोर्ट को बताया गया। 20 राज्यों में कुल 2239971 एनजीओ पंजीकृत हैं जिनमें से करीब 223428 ने ही पंजीकृत संस्था को आमदनी और खर्च का ब्योरा दिया है।

 

»  असम, गोवा, केरल, मणिपुर, मेघालय,नगालैंड, पंजाब, राजस्थान, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश में किसी भी एनजीओ ने अपनी आय व्यय का ब्योरा नहीं दिया। हालांकि इनमें से कुछ राज्यों में ब्योरा देने का कानूनी प्रावधान ही नहीं है।

 

»  एनजीओ की आमदनी और खर्च का मुद्दा महत्वपूर्ण है।  

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