सुशासन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल

»  पूरे विश्‍व में सरकारें नियमित रूप से विभिन्‍न माध्‍यमों के जरिए अपने नागरिकों से बातचीत करती हैं। कुशल और प्रभावी संचार तंत्र हमेशा से किसी भी सरकार के लिए सुशासन के लक्ष्‍यों की प्राप्ति के लिए एक महत्‍वपूर्ण माध्‍यम रहा है और आगे भी रहेगा।

 

»  पुराने जमाने में नागरिकों से संपर्क करने के लिए सरकारें ड्रम और ढोल जैसे उपकरणों का इस्‍तेमाल किया करती थीं। अब इनका स्‍थान इंटरनेट और डाटा ने ले लिया है। इंटरनेट और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के व्‍यापक इस्‍तेमाल ने संचार की गति तेज कर दी है, जिससे कोई भी सूचना बिना रोक-टोक के तत्‍काल लक्षित समूहों तक पहुंच रही है। 

 

»  सूचना प्रौद्योगिकी ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि सरकार द्वारा लिए गए नीतिगत निर्णयों पर तत्‍काल अमल हो और देश के हर हिस्‍से में इन्‍हें शीघ्रता से क्रियान्वित किया जाए। इसने यह भी सुनिश्चित किया है कि पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ-साथ नागरिकों की समस्‍याओं तथा सुझावों पर सरकार तत्‍काल प्रभावी कार्रवाई करे।

 

»  शासन को सुधारने में सूचना प्रौद्योगिकी की भूमिका के परिप्रेक्ष्‍य में इसकी मजबूती, कमजोरियों, अवसर और खतरे के अध्‍ययन (एसडब्‍ल्‍यूओटी) से यह बात सामने आई है कि सुशासन से नागरिकों को काफी फायदे हो रहे हैं। अध्‍ययन ने यह भी खुलासा किया है कि एक राष्‍ट्र के रूप में भारत ने अभी तक आईटी की क्षमताओं का सुशासन के लिए पूरा इस्‍तेमाल नहीं किया है। इस मामले में हमारी सफलताएं अलग-अलग और बिखरी हुई हैं।

 

»  भले ही हमारी प्रगति अपेक्षित नहीं है, फिर भी कुछेक सफलता की कहानियों ने यह साबित कर दिया है कि उन सबमें काफी संभावनाएं हैं और उन्‍हें सुशासन के लिए बड़े स्‍तर पर, पूरे राज्‍य में और यहां तक कि राष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी अपनाया जा सकता है।

 

»  उदाहरण के लिए छत्‍तीसगढ़ सरकार की सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) आधारित एक परियोजना पर गौर किया जा सकता है। इस परियोजना ने वहां की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को न केवल सुधार दिया, बल्कि उसे पारदर्शी और जवाबदेह आपूर्ति तंत्र के रूप में परिवर्तित कर दिया।

 

»  वितरण प्रणाली की गड़बडि़यों को रोकने के लिए 2007 में सभी सिरों को जोड़ते हुए छत्‍तीसगढ़ सरकार ने इस आईटी समाधान को अपनाया। इसके तहत वितरण के सभी स्‍तरों- उत्‍पादों की खरीद, भंडारण तथा उनके राज्‍य भंडार गृहों और उचित दर की दुकानों तक आवाजाही को भी कम्‍प्‍यूटरीकृत किया गया। वेब पर लगातार मिल रही रिपोर्टों के आधार पर वितरण के संचालन की नियमित निगरानी हरेक स्‍तर पर संभव हो गई। वेब प्रबंधन की वजह से संचालन में काफी जवाबदेही आ गई। ऑनलाइन मंच से सारे उत्‍पादों की उपलब्‍धता की जानकारी लगातार मिलती है, जिससे नीति निर्धारक प्रभावी ढंग से इन उत्‍पादों को उपयोग के लिए मंजूरी देते हैं।

 

»  छत्‍तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली की एक और विशेष बात यह है कि पोर्टल सरकार और उसकी एजेंसियों को नागरिकों से सीधे जोड़ता है। आम आदमी भी उत्‍पादों की आवाजाही पर नजर रख सकता है और अपनी समस्‍याओं को सरकार तक शीघ्रता से पहुंचा सकता है। छत्‍तीसगढ़ की इस योजना ने उत्‍साहवर्धक परिणाम दिए हैं। ओडिशा, उत्‍तर प्रदेश और मध्‍य प्रदेश ने भी इसी तरह की योजना अपने यहां लागू करने में रुचि दिखाई है।

 

»  अगला उदाहरण कर्नाटक का है, जहां भू- रिकॉर्ड के मामले में सरकार को भ्रष्‍टाचार मिटाने में सफलता मिली है। 'भूमि' परियोजना कर्नाटक की भू-रिकॉर्डों के कम्‍प्‍यूटरीकरण की सफल कहानी है। इस परियोजना पर काम वर्ष 1999 में शुरू हुआ था। वर्ष 2001 में नागरिकों और अन्‍य भागीदारों के लिए पहली ऑनलाइन सेवाएं शुरू की गईं। 2006 तक 'भूमि' ने काफी प्रगति कर ली। वर्तमान में 'भूमि' कार्यक्रम के तहत प्रत्‍येक वर्ष करीब ढाई करोड़ लोगों को संपत्ति रिकॉर्ड जारी किए जा रहे हैं।

 

»  करीब 800 टेली-केन्‍द्रों के माध्‍यम से सरकार किसानों को उनके द्वार पर रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (आरओआर) उपलब्‍ध करा रही है। इस कार्य के लिए ताल्‍लुका की जगह गांव को इकाई बनाने के प्रयास जारी हैं।

 

»  इसी तरह, गुजरात सरकार की भी भू-रिकॉर्ड कम्‍प्‍यूटरीकरण योजना को जबर्दस्‍त सफलता मिली है। 'ई-धारा' (अब ई-जामिन) के नाम से शुरू की गई इस योजना के तहत गुजरात के 26 जिलों के 225 ताल्‍लुकों को गुजरात स्‍टेट वाइड एरिया नेटवर्क से जोड़ा गया। ताजा अनुमानों के मुताबिक 'ई-धारा' के तहत जारी किए जा रहे संपति रिकॉर्डों की संख्‍या 1.58 करोड़ से बढ़कर तीन करोड़ प्रति वर्ष हो गई है।

 

»  पंजीयन के साथ सुरक्षित लेन-देन सुनिश्चित करने के लिए 'ई-धारा' ने संपत्ति मालिकों की फोटो और फिंगर प्रिंट भी लेना शुरू कर दिया। ताल्‍लुका स्‍तर पर उप मामलतदार द्वारा जांच के लिए वहां फिंगर प्रिंट स्‍काइनर्स भी उपलब्‍ध कराया गया है। इन उपायों से डाटा की सुरक्षा काफी बढ़ गई है। वर्ष 2011 में सभी 227 'ई-धारा' केन्‍द्रों पर हुए लेन-देन को एक केन्‍द्रीय सर्वर में डाला गया, जिससे डाटा पर केन्‍द्रीय नियंत्रण बढ़ गया। यह योजना वित्‍तीय तौर पर खुद सक्षम है। आरओआर की प्रतिलिपियों के एवज में लिए गए शुल्‍क से आज 'ई-धारा' की आमदनी दो करोड़ रूपये प्रति माह है। ऊपर दिए गए तीनों मामलों में यही दर्शाया गया है कि कैसे आईटी की मदद से सुशासन को अपनाया जाए और इसे आगे बढ़ाया जाए।

 

»  आईटी आधारित योजनाओं को लागू करने से वे तमाम सरकारी सेवाएं, जो भ्रष्‍टाचार और विलंब की वजह से आम नागरिकों की पहुंच से दूर थीं, अब आसानी से मुहैया कराई जा रही हैं। किसी भी व्‍यक्ति के लिए पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्‍त करना एक बड़े मिशन जैसा हो गया था। रेल टिकटों की बिक्री में आईटी के इस्‍तेमाल से न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि यात्रियों को भी काफी सहूलियत हो गई है। - इस साल 15 अगस्‍त को लालकिले से प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने सुशासन के लिए आईटी के व्‍यापक इस्‍तेमाल पर जो जोर दिया, उससे यह सुनिश्चित हो गया है कि आने वाले समय में हमें आईटी के इस्‍तेमाल के साथ सुशासन की कई सफल क‍हानियां मिलेंगी। प्रधानमंत्री ने कहा '' ई-गवर्नेंस आसान, प्रभावी और आर्थिक गवर्नेंस भी है। ई-गवर्नेंस सुशासन के लिए मार्ग प्रशस्‍त करता है।''

 

»  सुशासन भारत में किसी राजनीतिक दल, नेता या किसी एक राज्‍य का विशेष मुद्दा नहीं है। यह एक माध्‍यम है, जो यह सुनिश्चित करता है कि शासन के लिए जिम्‍मेदार लोग अपना काम जवाबदेही के साथ करें। यह नागरिकों को भरोसा भी दिलाता है कि उनके द्वारा चुने गए जन प्रति‍निधि प्रभावी तरीके से नीतियां बनाएंगे और उन्‍हें लागू करेंगे।

 

»  राजनीति, शिक्षा, धर्म और कारपोरेट क्षेत्र के दिग्‍गजों ने राष्‍ट्र के विकास के लिए सुशासन को एक जरूरी माध्‍यम के रूप में अपनाने पर जोर दिया है। महात्‍मा गांधी ने कहा था ''जो बदलाव हम दूसरों में चाहते हैं, पहले अपने में लाएं।'' यह संदेश उन तमाम लोगों के लिए है, जो सुशासन की चाहत रखते हैं।

 

»  इस पीढ़ी के नीति निर्धारक और प्रशासक भाग्‍यशाली हैं कि उनके पास आईटी जैसा सशक्‍त माध्‍यम है। इसे सुशासन के लिए इस्‍तेमाल करने की भरपूर संभावनाएं हैं। साथ ही यह खतरा भी है कि इस सशक्‍त माध्‍यम को हम कहीं खो न दें। मोबाइल सेटों की तेजी से बढ़ती संख्‍या, ब्रॉडबैंड, नये ऑपरेटिंग सिस्‍टमों और घरेलू एप्‍लीकेशनों के साथ यह यात्रा काफी रोचक होगी। इन में से प्रत्‍येक सुशासन के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने का एक मंच है।  

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