साकार होता डिजिटल इंडिया का सपना

भारत को डिजिटल बनाने का हमारा सपना अब साकार होता नजर आ रहा है। ग्रामीण और शहरी भारत तथा डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल करने वाले और न करने वालों के बीच चौड़ी खाई को देखते हुए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम भारत के नागरिकों को विश्व के अन्य विकसित देशों के लोगों के समकक्ष लाने में एक अहम पड़ाव साबित होगा। इस कार्यक्रम की घोषणा हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। इसका लक्ष्य है लोगों को डिजिटल रूप से साक्षर बनाना ताकि वे अनंत संभावनाओं के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठा सकें। जो विचार कभी दूर की कौड़ी लगता था, अब हकीकत बन गया है।

 

तीन मूल जरूरतों-पानी, गैस और बिजली की आपूर्ति में प्रौद्योगिकी की अहम भूमिका हो गई है। हमारे राजनेताओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश के विकास में राष्ट्रीय राजमार्ग की तरह ही ब्रॉडबैंड हाइवे भी जरूरी हैं। आज सरकार समझ रही है कि इसका मूल लक्ष्य बेहतर सुविधाएं मुहैया करना, नवाचार को बढ़ावा देना और अधिक से अधिक रोजगारों का सृजन करना है। प्रौद्योगिकी और डिजिटल राष्ट्र की आधारशिला पर ही आधुनिक भारत की बुलंद इमारत खड़ी होगी। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का उद्देश्य हर नागरिक की जरूरत के लिए डिजिटल ढांचा उपलब्ध कराना है। इसके अलावा सुचारू रूप से शासन चलाने के लिए सरकार को डिजिटल सुविधाएं प्रदान करना और नागरिकों का डिजिटल सशक्तीकरण करना भी इसका लक्ष्य है। 

 

इस परियोजना ने विकास के नौ स्तंभों को चिह्नित किया है। सबसे पहले सरकार के लिए ब्रॉडबैंक हाइवे का निर्माण करना है। इसके दायरे में ढाई लाख ग्राम पंचायतें आएंगी। दिसंबर 2016 तक यह कार्य पूरा किया जाना है। इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड के अधिक से अधिक विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके लिए नए भवनों को संचार की ढांचागत सुविधाओं से लैस करना अनिवार्य किया जाएगा। देश के दूर-दराज के भागों में भी ब्रॉडबैंड का विस्तार कर वहां आधुनिक प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार मोबाइल कनेक्शन के दायरे में भी विस्तार करना चाहती है। इस प्रकार 2018 तक 40000 गांव मोबाइल प्रौद्योगिकी के दायरे में आ जाएंगे। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का एक अहम अंग है राष्ट्रीय ग्रामीण इंटरनेट अभियान (एनआरआइएम)। इसके तहत कम्युनिटी सर्विस सेंटर के माध्यम से ढाई लाख से अधिक गांवों में इंटरनेट की सुविधा पहुंचाई जाएगी। यह कार्यक्रम ई-शासन के संदर्भ में जनभागीदारी बढ़ाने और नागरिकों के सशक्तीकरण पर अधिक ध्यान केंद्रित करेगा। इसके माध्यम से विकसित प्रौद्योगिकी के सहारे सरकार नागरिकों के साथ बेहतर संवाद स्थापित कर पाएगी। इसमें संदेह नहीं कि ऑनलाइन आवेदनों और निष्पादन के कारण सरकार की कार्यक्षमता में सुधार होगा।

 

ऑनलाइन पद्धति से योजनाओं के निष्पादन में तेजी आएगी। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है ई-क्रांति। इसके माध्यम से देश में अनेक सेवाओं की आपूर्ति में क्रांतिकारी सुधार देखने को मिलेंगे। ई-क्रांति शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे विषयों में बेहतर सुविधाएं जुटाने में मददगार होगी। इसके तहत नागरिकों को सरकारी नीतियों, सेवाओं की सूचनाओं की मुफ्त जानकारी मिलेगी।  डिजिटल इंडिया कार्यक्रम इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के आयात को पूरी तरह खत्म करने के सरकार के लक्ष्य की पूर्ति में भी सहायक सिद्ध होगा। इसके तहत देश में इलेक्ट्रॉनिक आइटमों के विनिर्माण का केंद्र विकसित किया जाएगा। हमारा मानना है कि इससे भारत में विनिर्माण क्षमताओं का विकास होगा और देश का विनिर्माण हब के रूप में रूपांतरण होगा। कार्यक्रम के एक अंग के तौर पर सरकार छोटे-छोटे कस्बों और गांवों में आइटी क्षेत्र के लिए कार्यबल तैयार करेगी।

 

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को तीव्रता देने के मकसद से सरकार ने कुछ सहायक कार्यक्रमों की घोषणा की है। इनमें तमाम विश्वविद्यालयों में 2015 तक वाई-फाई की सुविधा देने, ईमेल की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों को वाई-फाई शहर बनाना शामिल है। डिजिटल इंडिया का संबंध महज किसी मोबाइल फोन, कार, रेफ्रिजरेटर या फिर स्वास्थ्य उपकरणों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध तो इन सबके बीच समन्वय स्थापित करना है। वर्ष 1984 में एक हजार से अधिक उपकरणों को इंटरनेट से जोड़ा गया था। 2014 में मोबाइल एप्स पर दस अरब उपकरण 77 अरब आइटम्स को डाउनलोड कर चुके हैं। अगले दशक में 50 अरब उपकरण इंटरनेट से जुड़ चुके होंगे। इंटरनेट के माध्यम से हम भारी मात्र में डाटा हासिल कर पाएंगे। सिस्को का अनुमान है कि 2018 तक भारत में 1.8 अरब उपकरण इंटरनेट से जुड़ जाएंगे। 

 

डिजिटल इंडिया में इन कनेक्शनों के माध्यम से दुनिया भर का ज्ञान हमारी मुट्ठी में होगा और इससे लोगों के जीवन पर इतना असर पड़ेगा जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की गई। भारत डिजिटल प्रौद्योगिकी को गले लगाने को तत्पर है। वह ब्रॉडबैंड विस्तार, इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण और ई-गवर्नेस से होने वाले लाभ की फसल काटने की तैयारी कर रहा है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का क्रियान्वयन देश के समक्ष खड़ी चुनौतियों से निपटने, अवसरों का लाभ उठाने, नागरिकों को बेहतर ढांचागत सुविधाएं प्रदान करने और जीवन स्तर में सुधार में सहायक सिद्ध होगा। हमारा मानना है कि सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम में भागीदारी से उद्योग जगत के सामने बड़े अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही इससे 120 करोड़ भारतीयों के जीवन का कायाकल्प होगा और भारत विश्व समुदाय के केंद्र में वापसी करेगा।

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