मार्च 2015 तक सबको मिल जाएगा

- आधार कार्ड के सहारे सरकारी योजनाओं से भ्रष्टाचार दूर करने के इरादे से सरकार अगले साल मार्च तक सबको आधार नंबर दिलाने की तैयारी कर रही है।

- केंद्र ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) को चालू वित्त वर्ष के अंत तक सबको आधार नंबर जारी करने को कहा है।

- सबको आधार मिलने पर रसोई गैस की सब्सिडी और सरकारी योजनाओं की धनराशि लाभार्थी के बैंक खाते में भेजने में सुविधा होगी।

- प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने यूआईडीएआई को मार्च, 2015 तक देश की पूरी जनसंख्या (करीब 121 करोड़) को आधार नंबर जारी करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश हाल में इस परियोजना की समीक्षा के लिए बुलाई गई एक बैठक में दिया गया। इससे पहले भी सरकार सबको आधार नंबर देने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए तय दिसंबर, 2015 की समयसीमा घटाकर जून, 2015 कर चुकी है।

 

अब तक 70 करोड़ आधार - यूआईडीएआई अब तक 70 करोड़ लोगों को आधार नंबर जारी कर चुका है। आंध्र प्रदेश, केरल, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, सहित नौ राज्यों में 90 प्रतिशत से अधिक लोगों को आधार कार्ड मिल चुका है, जबकि 16 राज्यों में आधार पाने वालों की संख्या 70 प्रतिशत से अधिक है।

 

- बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ इस मामले में पिछड़ रहे थे, लेकिन हाल में यूआईडीएआई के पांचवें चरण की शुरुआत के बाद इन राज्यों में भी आधार पंजीकरण की प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है। 

 

- इन चारों राज्यों में देश की लगभग 34 प्रतिशत आबादी है। अब तक इन राज्यों में 8.93 करोड़ लोगों को आधार जारी हुए हैं। यूआईडीएआई के अनुसार देशभर में 25,000 से अधिक आधार किट के जरिये रोजाना 10 लाख से ज्यादा लोगों का पंजीकरण हो रहा है।

 

राष्ट्रीय पहचान कार्यक्रम :- - आधार तथा राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) भारत सरकार के राष्ट्रीय पहचान कार्यक्रम हैं। 

 

- इसमें से आधार का क्रियान्वयन यूआईडीएआई करता है, जबकि एनपीआर गृह मंत्रालय के अधीन भारत के महापंजीयक द्वारा चलाया जाता है। 

- दोनों योजनओं के तहत दस अंगुलियों के निशान, दोनों आंखों की पुतलियां तथा फोटो के जरिये बायोमेट्रिक डाटा जुटाए जाते हैं। सूचीकरण प्रक्रिया के दौरान आवासीय पते की पहचान भी की जाती है।

 

- यह "हर समय, हर जगह, हर तरह से" किसी की प्रामाणिकता साबित करने में मदद मिलेगी । इसके साथ ही आधार कार्ड प्रवासियों के लिए वैश्विक पहचान का जरिया बनेगा।

 

- सभी राज्य सरकारों को लिखे पत्र में गृह मंत्रालय ने कहा है कि एक आधार संख्या केवल एक व्यक्ति को आवंटित की जाती है। इससे किसी पहचान की व्यापक पुष्टि करने में मदद मिलेगी।

 

- पत्र में कहा गया है कि चूंकि "आधार" व्यक्ति की जनसंख्या संबंधी और बायोमेट्रिक सूचना पर आधारित है, इसलिए इससे धोखाधड़ी और फर्जी गतिविधियों को समाप्त करने में मदद मिलेगी। इसे किसी की पहचान के सत्यापन का एकमात्र स्रोत माना जाएगा।

 

होंगे कई फायदे -गृह मंत्रालय ने अपने पत्र में कहा है कि आधार कार्ड के कई फायदे होंगे। इसका इस्तेमाल कई जगहों पर आसानी से पहचान साबित करने के लिए किया जा सकेगा। -बैंक खाता खोलने, ऑनलाइन टिकट कटाने, पासपोर्ट के लिए आवेदन करने सहित अन्य जिस किसी काम में पहचान की जरूरत होती है, वहां इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। -आधार प्रवासियों को सार्वभौम पहचान प्रदान करेगा। सरकारों के लिए इसके जरिए लोगों तक प्रभावी तरीके से सुविधाएं पहुंचाना आसान हो जाएगा।

 

बढ़ेगी इसकी उपयोगिता - ज्यादा-से-ज्यादा सरकारी योजनाओं को आधार से जोड़ा जा रहा है। इससे आने वाले दिनों में इसकी उपयोगिता बढ़ती ही जाएगी।  - आधार से गरीबों को सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का लाभ लेने में मदद मिलेगी। यह पहचान का सबसे सरल साधन बन जाएगा।

 

 पहले गृह मंत्रालय ने भारतीय विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईडीएआई) के आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा था कि पहचान की विशिष्टता किसी की पहचान की प्रामाणिकता या दूसरे आधार संख्या की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी शर्त नहीं है। 

 

- गृह मंत्रालय ने आधार संख्या प्राप्त करने के लिए लोगों की ओर से दिए गए पहचान और पते का प्रमाण संबंधी दस्तावेजों पर भी सवाल खड़ा किया था।  

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