नदियों को जोड़ने की परियोजना और वर्तमान स्तिथि

- ‘नदियों को जोड़ने की परियोजना राष्‍ट्रीय महत्‍व की है और इसका उद्देश्‍य देश में जल के समान वितरण को सुनिश्चित करना है, जिससे बाढ़ और सूखे से प्रभावित क्षेत्रों को विशेष लाभ होगा। इस राष्‍ट्रीय महत्‍व के कार्य में सभी राज्‍यों के सहयोग आवश्यक है ।

 

- इससे देश का खाद्य उत्‍पादन बढ़ेगा और रोजगार के नये अवसर भी पैदा होंगे, जिससे देश में समृद्धि आएगी।

 

- नदियों को जोड़ने की परियोजना के अंतर्गत राष्‍ट्रीय जल विकास एजेंसी ने अब तक देश में नदियों को जोड़ने के 30 संपर्कों की पहचान की है, जिनमें से 16 संपर्क प्रायद्वीपीय क्षेत्र के हैं और 14 अन्‍य हिमालयी क्षेत्र के है। 

 

- इनमें से प्रायद्वीपीय क्षेत्र के 14 संपर्कों और हिमालयी क्षेत्र के 2 संपर्कों (भारतीय भाग) की साध्‍यता रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। 7 अन्‍य संपर्कों का सर्वेक्षण एवं अन्‍वेषण कार्य पूरा किया जा चुका है और इनकी साध्‍यता रिपोर्ट का मसौदा तैयार हो गया है।

 

"लाभ ":- - नदियों को जोड़ने से संबंधित राष्‍ट्रीय परिप्रेक्ष्‍य योजना के अनुसार इससे 35 मिलियन हेक्‍टेयर अतिरिक्‍त भूमि को सिंचाई की सुविधा उपलब्‍ध होगी, जिससे देश में सिंचाई सुविधा प्राप्‍त भूमि का क्षेत्रफल 140 मिलियन हेक्‍टेयर से बढ़कर 175 मिलियन हेक्‍टेयर हो जाएगा। 

 

- इससे बाढ़ नियंत्रण, नौवहन, जलापूर्ति, मत्‍स्‍य पालन, लवणता एंव प्रदूषण नियंत्रण आदि लाभों के अलावा 34 हजार मेगावाट अतिरिक्‍त बिजली का भी उत्‍पादन हो सकेगा।

 

वर्तमान स्तिथि :- - विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का कार्य शुरू करने के लिए पांच प्राद्वीपीय संपर्कों : 1- केन-बेतवा, 2- पार्वती-कालीसिंध-चंबल 3- दमनगंगा-पिंजाल, 4- पार-तापी-नर्मदा और 5- गोदावरी (पोलावरम)-कृष्‍णा (विजयवाड़ा) को प्राथमिकता संपर्कों के रूप में चिन्हित किया गया है।  -

केन-बेतवा संपर्क पर काम भी शुरू हो गया है। 

- दमनगंगा-पिंजाल संपर्क की डीपीआर पूरी हो चुकी है और यह आगे की कार्रवाई हेतु अप्रैल, 2014 में महाराष्‍ट्र और गुजरात सरकार को प्रस्‍तुत कर दी गई है।

- पार-तापी-नर्मदा संपर्क की डीपीआर तैयार की जा रही है और यह मार्च, 2015 तक पूरी कर ली जाएगी।

- बिहार सरकार के अनुरोध पर एजेंसी ने क्रमश: दिसंबर, 2013 और मार्च, 2013 में बूढ़ी गण्‍डक-नून-बया-गंगा अंत:राज्‍यीय संपर्क परियोजना और कोसी-मेची संपर्क परियोजना की डीपीआर तैयार करके उसे आगे की कार्रवाई के लिए राज्‍य सरकार को भेज दिया है।

 

समस्या:- - इस परियोजना को लागू करते समय इसके पर्यावरणीय, पारिस्थितिकीय और सामाजिक पहलुओं को ध्यान में रखना आवश्यक है I -

- बड़ा निवेश , भूमि अधिग्रहण भी बड़ी समस्या I

- कई राज्यों के बीच आपसी विवाद भी बड़ी रूकावट है। 

- कई नदियों का उद्गम स्थल और समाहन दूसरे राष्ट्रों में होता है। इस कारण उनकी सहमति भी आवश्यक है।  

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