लोकपाल कानून व दिल्ली विशेष पुलिस संस्थापना अधिनियम(डीएसपीई) में संशोधन की तैयारी

- केंद्र सरकार लोकपाल व लोकायुक्त कानून और दिल्ली विशेष पुलिस संस्थापना अधिनियम (डीएसपीई) में संशोधन करने की तैयारी में है।

- इसके जरिये लोकपाल (अध्यक्ष व सदस्य) और सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति के लिए गठित चयन समितियों में कोरम की जरूरत को खत्म किया जाएगा।

- दोनों कानूनों में नए प्रावधान जोड़कर यह स्पष्ट कर दिया जाएगा कि कोरम पूरा नहीं होने की स्थिति में संबंधित चयन समितियों की प्रक्रिया अमान्य नहीं होगी।

- वर्तमान लोकसभा में किसी भी दल को विपक्ष का औपचारिक दर्जा नहीं दिया गया है। गौरतलब है कि सीबीआई अध्यक्ष रंजीत सिन्हा 2 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

 

इस समय ये है व्यवस्था:- - हालांकि, लोकपाल और डीएसपीई कानून कोरम के मुद्दे पर मौन है, लेकिन सरकार इनमें संशोधन कर देना चाहती है, ताकि भविष्य में चयन समितियों के फैसले को कोर्ट में चुनौती न दी जा सके। 

- सरकार डीएसपीई कानून में भी संशोधन करने जा रही है। इसके जरिये लोकसभा में मान्यता प्राप्त विपक्षी दल के अभाव में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी को चयन समिति में जगह दी जाएगी।

 

संशोधन की जरूरत क्यों:- - ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि किसी एक सदस्य की अनुपलब्धता के कारण बेवजह का इंतजार न करना पड़े और किसी भी सदस्य की अनुपस्थिति में हुई बैठक को अमान्य करार न दिया जा सके।

 

लोकपाल के लिए यह समिति:- - लोकपाल चयन समिति में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा में विपक्ष के नेता, भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा नामित सुप्रीम कोर्ट का जज और राष्ट्रपति या अन्य सदस्य द्वारा नामित प्रतिष्ठित न्यायविद सदस्य के तौर पर शामिल होते हैं। 

- यह समिति लोकपाल अध्यक्ष और सदस्यों का चयन करती है।

 

सीबीआई प्रमुख के लिए यह समिति:- - सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति के लिए गठित चयन समिति में प्रधानमंत्री बतौर अध्यक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा नामित सुप्रीम कोर्ट का जज और लोकसभा में विपक्ष के नेता सदस्य के तौर पर शामिल होते हैं।  

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