स्मार्ट सिटी की योजना पर अमल शुरू

- प्रधानमंत्री की देशभर में 100 स्मार्ट सिटी बनाने की योजना अब परवान चढ़ने लगी है.

- सरकार ने इसके लिए 22 राज्यों के साथ बातचीत शुरू कर योजना का खाका बनाना शुरू कर दिया है.

- सरकार ने उन सभी जगहों की पहचान कर ली है जहां ये शहर विकसित किये जायेंगे. इनमें नये शहरों के साथ-साथ वे पुराने शहर भी शामिल हैं जिन्हें नया कलेवर दिया जायेगा. सरकार ने वर्ष 2019 तक पहले तीन स्मार्ट शहर विकसित करने का लक्ष्य रखा है.

- आरंभिक योजना में गुजरात, केरल, राजस्थान और कर्नाटक में सात-सात स्मार्ट सिटी बनाने का निर्णय लिया गया है.

- उत्तर प्रदेश में बनाये जाने वाले 6 स्मार्ट शहरों में मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी भी शामिल है.

- योजना को अमलीजामा पहनाने की दिशा में तेजी से कदम उठाते हुए सरकार ने इन 22 राज्यों से विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट मांगी है जिससे इन शहरों के निर्माण से जुड़ी योजना के ब्लूप्रिंट को अंतिम रूप दिया जा सके.

- सरकार ने इस योजना के लिए अपने पहले बजट में 7060 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. इसके अलावा जरूरी निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से खुद प्रधानमंत्री अपनी विदेश यात्राओं के दौरान विदेशी कंपनियों को लुभाने में लगे हैं. अपनी जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया यात्राओं के दौरान मोदी ने वहां की कंपनियों से भारत में ढांचागत क्षेत्र में निवेश की अपील की है.

- सिंगापुर, जर्मनी, ब्रिटेन, अमेरिका और दक्षिण कोरिया की कंपनियों ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में निवेश की रूचि दिखाई है.

- पहली तीन स्मार्ट सिटी दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे परियोजना के हिस्से के रूप में बसाये जायेंगे. ये शहर हैं धोलेरा, सेनदरा,बिदकिन और ग्लोबल सिटी होंगे.

- यह गलियारा परियोजना जापान के सहयोग से बनाई जा रही है और इसके तहत दिल्ली तथा मुंबई के बीच सात शहर बसाये जायेंगे.

- इसके अलावा तीन अन्य औद्योगिक गलियारों अमृतसर, कोलकाता, बेंगलूरू,चेन्नई और चेन्नई-विशाखापतनम के साथ-साथ भी स्मार्ट सिटी बनाने का निर्णय लिया गया है.

- इन स्मार्ट शहरों में आवागमन के साधनों का एकीकृत नेटवर्क खड़ा किया जायेगा. इनमें बीआर टी कॉरिडोर, उप नगरीय ट्रेन नेटवर्क, पैदल और साइकिल चालकों के लिए अलग लेन का प्रावधान होगा.

- इन शहरों में तकनीक के अधिक से अधिक इस्तेमाल से जीवन को सरल बनाने के तमाम साधन भी होंगे. इसके अलावा ऊर्जा और जल संसाधनों के प्रबंधन के साथ साथ सुरक्षा तंत्र पर भी जोर होगा.  

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