स्वच्छता और स्वच्छता दूत

- हर गांव में स्वच्छता दूत होगा, जो स्वच्छता व शौचालय की जरूरत और महत्व के बारे में लोगों को बताएगा।

- घरों में शौचालय होने के बावजूद अब भी आदतन लोग खुले में शौच करने जाते हैं। इन्हीं लोगों की सोच बदलने में इन स्वच्छता दूतों की अहम भूमिका होगी।

- घर में शौचालय होने के बावजूद खुले में शौच करने वालों की सोच बदलने के लिए सरकार सघन अभियान चलाएगी। 

- स्वच्छता और शौचालय के उपयोग को लेकर जनजागरण की रूपरेखा तैयार की गई है। इसके तहत गांव-गांव ऐसे कार्यकर्ता नियुक्त किए जाएंगे, जो स्थानीय होने के साथ सामाजिक कार्यों में रुचि रखते हों।

- ये "स्वच्छता दूत" लोगों को साफ-सफाई के तौर तरीकों से तो वाकिफ कराएंगे ही, उन्हें शौचालय निर्माण के लिए प्रोत्साहित भी करेंगे। इन स्वच्छता दूतों को वेतन की जगह प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।

- इंदिरा आवास योजना के तहत बनाए जाने वाले आवासों के लिए हर गांव में सामूहिक शौचालय बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी ग्रामसभा स्तर पर इन्हीं स्वच्छता दूतों को सौंपी जा सकती है।

- खुले में शौच जाने वालों को रोकने के लिए अभियान चलाने के साथ लोगों को शौचालय के उपयोग की जानकारी भी स्वच्छता दूतों की ओर से दी जाएगी।

- ग्रामीण क्षेत्रों के 11.11 करोड़ घरों में शौचालय नहीं है। 

- जबकि, आंगनबाड़ी केंद्रों, ग्रामीण स्कूलों और सार्वजनिक सामूहिक शौचालयों की संख्या लाखों में है।

- केंद्र सरकार की कार्ययोजना में शौचालय बनवाने के लिए सांसद और विधायक निधि का उपयोग करने को कहा गया है।  

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