ट्रोजन

- साइबर सुरक्षा कर्मियों ने देश में ऑनलाइन बैंकिंग करने वाले इंटरनेट यूजर्स को खतरनाक "ट्रोजन" वायरस के खिलाफ सतर्क किया है। 

 

- यह वायरस उपभोक्ताओं के गोपनीय डाटा और पासवर्ड को चुराता है। इसे लेकर कंप्यूटर इमरजेंसी टीम ऑफ इंडिया (सीईआरटी-आई) ने ऑनलाइन बैंकिंग सिस्टम का उपयोग करने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए एक ताजा परामर्श जारी किया है। 

 

- इस वायरस को सिस्टम से अन्य जानकारियां मसलन ऑपरेटिंग सिस्टम का ब्योरा, सिस्टम कंफिगरेशन आदि चुराने में महारत हासिल है। एक बार क्रेडिट या डेबिट की जानकारी हाथ लग गई तो हैकर आसानी से कार्ड से रकम उड़ा सकता है। पॉस डेबिट या क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन पेमेंट वाली किसी दुकान या व्यापारिक प्रतिष्ठान के सिस्टम को ढूंढ़ता है

 

- यह वायरस मुख्य तौर पर माइक्रोसाफ्ट विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग कर रहे नामचीन वित्तीय संस्थानों के ग्राहकों को निशाना बना रहा है। 

 

- परामर्श में बताया गया, "यह सोशल इंजीनियरिग तकनीय या स्पैम संदेशों के माध्यम से प्रसारित किया जा रहा है। यानी यह वायरस वित्तीय संस्थान की तरफ से भेजा गया एक वास्तविक मेल जैसा प्रतीत होता है जिसमें एक जिप या पीडीएफ फाइल होती है।

 

- इस जिप फाइल में स्वचालित वायरस होता है। इस पर जैसे ही यूजर क्लिक करता है तो यह गोपनीय डाटा और पासवर्ड चुराने के लिए लक्ष्य सिस्टम पर खुद को स्थापित कर लेता है।"

 

Note: सीईआरटी-आई एक नोडल एजेंसी है जो भारतीय इंटरनेट डोमेन में हैकिंग और सुरक्षा संबंधित चुनौतियों से मुकाबला करती है।  

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