सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता को ब्रिटेन और फ्रांस का समर्थन: सुरक्षा परिषद सुधार

- ब्रिटेन, फ्रांस और नेपाल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सदस्यता दिए जाने का समर्थन किया है। - इसके साथ ही सदस्य देशों ने संयुक्त राष्ट्र के इस शक्तिशाली घटक में लंबे समय से अटके सुधार प्रस्तावों की धीमी प्रगति पर भी चिंता जताई है। 

 

- महासभा सत्र में उपस्थित देशों ने परिषद में वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार बदलाव पर जोर दिया।

 

- "उचित प्रतिनिधित्व और सुरक्षा परिषद की सदस्यता का विस्तार" विषय पर चर्चा शुरू करते हुए महासभा के अध्यक्ष सैम कुटेसा ने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार उनकी प्राथमिकता में है।

 

- भारत ने सुरक्षा परिषद के मौजूदा स्वरूप को "गंभीर रूप से अक्षम अंग" बताते हुए अगले साल तक सुधार की जरूरत पर बल दिया है।

 

- भारत ने कहा कि इसके सुधार और विस्तार के बारे में "वास्तविक वार्ता" शुरू करने के लिए एक मसौदा पेश किया जाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि अशोक मुखर्जी ने सुरक्षा परिषद के मौजूदा स्वरूप की खामियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अपनी गैरप्रतिनिधित्व प्रकृति के कारण अपने सामर्थ्य के क्षेत्रों में भी यह शक्तिशाली ईकाई विश्वसनीयता हासिल नहीं कर सकी है।

 

- "सुरक्षा परिषद में सुधार का मसला 2005 से अटका पड़ा है। इस बारे में काफी चर्चा हो चुकी है। अब यूएन के सदस्य राष्ट्रों को चर्चा के आधार पर सुधारों को आगे बढ़ाना चाहिए। 

 

- संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के राजदूत मार्क लायल ग्रांट ने कहा कि उनकी सरकार जर्मनी, ब्राजील, भारत और जापान की स्थायी सदस्यता और स्थायी अफ्रीकी प्रतिनिधित्व का समर्थन करती है। साथ ही हम परिषद के अस्थायी सदस्यों की संख्या में बढ़ोतरी चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वीटो अधिकार को बढ़ाने या न बढ़ाने पर विवाद के कारण सुधार प्रक्रिया बाधित हुई है। 

 

- फ्रांस के प्रतिनिधियों ने भी ब्रिटेन के रुख से समर्थन जताया।  

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