जानलेवा वायरस(कैनाइन डिस्टेम्पर वायरस/सीडीवी) से विलुप्त होते बाघ

- पहले ही वनों के सफाए, शिकार की मार झेल रहे बाघ अब एक जानलेवा वायरस के कारण विलुप्त होने की कगार पर जा पहुंच सकते हैं। 

 

- चेचक के विषाणु से मिलता-जुलता ये संक्रमण कैनाइन डिस्टेम्पर वायरस (सीडीवी) के नाम से जाना जाता है।

 

- वन्यजीव संरक्षण संगठन (डब्लूसीएस) के एक नए शोध के अनुसार घातक कैनाइन डिस्टैम्पर वायरस (सीडीवी) इतनी तेजी से बाघों में फैल रहा है कि ये उनका समूल नाश कर सकता है। अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि पिछले कुछ सालों से बहुत से बाघों की मौत की वजह सीडीवी ही बताया जा रहा है।

 

- बाघों की संख्या पर सीडीवी के दूरगामी प्रभाव को देखते हुए लगता है कि बाघों में ये वायरस पहले कभी नहीं देखा गया। और अब ये इनका काल बनकर सामने आया है। 

 

- प्राख्यात वैज्ञानिकों का मानना है कि सीडीवी जैसी जानवरों में होने वाली घातक बीमारी पहले से ही खतरे में जी रहे बाघों को पूरी दुनिया से सफाया कर सकती है।

 

- शोधकर्ताओं ने अपने अनुसंधान में पाया कि इस संक्रामक रोग का सबसे अधिक प्रकोप रूस के सिखोट-एलिन जैवक्षेत्र जापोवेनिक (एसएबीजेड) में अमूर बाघों में पाया गया। 

 

- यहां वर्ष 2007 से 2012 के बीच बाघों की संख्या 38 से घटकर मात्र 9 रह गई है। 2009 और 2010 में छह वयस्क बाघों की मौत हो गई या फिर वह टाइगर रिजर्व से गायब हो गए। इनमें से दो मृत बाघों में सीडीवी वायरस की पुष्टि की गई।

 

- 2003 से बाघों की मौत को लेकर शुरू हुई सीडीवी जांच में वैज्ञानिकों ने पाया कि अगले पचास सालों में हर 25 बाघ के सीडीवी संक्रमण के शिकार होने का खतरा है। 

 

- ऐसे में पूरी दुनिया में ऐसी जगह पर इस वायरस के संक्रमण से अधिक खतरा हो सकता है जहां 25 बाघ तक ही मौजूद हैं। 

 

- जांच में पाया गया बाघ से बाघ में ये संक्रमण अधिक तेजी से फैल रहा है। ये संक्रमण पालतू कुत्ते और वन्यजीवों से भी फैलता है।

 

क्या है सीडीवी संक्रमण - चेचक के समान संक्रमण वाले कैनाइन डिस्टैम्पर वायरस का संक्रमण प्रायः कुत्तों, सियार और लोमड़ियों में होता है। लेकिन मौजूदा समय में ये जानलेवा संक्रमण बाघों में भी देखा जा रहा है। 

 

- सीडीवी वायरस की खोज सबसे पहले फ्रांस में हुई थी।  - ये वायरस पाचन और श्वसन प्रक्रिया को प्रभावित करने के बाद दिमाग और रीढ़ की हड्डी पर प्रहार करता है। इसके लक्षण तेज बुखार, आंख-नाक से पानी गिरना, नाक और खुरों का सख्त होना और उल्टी-डायरिया है।

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