खाद्य सुरक्षा मसले पर भारत और अमेरिका में बनी सहमति

- विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में बने गतिरोध को दूर करने की दिशा में भारत और अमेरिका ने एक अहम कदम बढ़ा दिया है। - भारत में खाद्य सुरक्षा की जरूरतों को देखते हुए दोनों देश खाद्य सब्सिडी में कमी के प्रावधान को स्थायी समाधान मिलने तक टालने के लिए तैयार हो गए हैं। - भारत और अमेरिका के बीच बनी इस सहमति के बाद विश्व व्यापार संगठन में व्यापार सुविधा समझौते को लागू करने की अड़चन अब दूर हो गई है। - अमेरिका के रुख में आई नरमी को भारत के लिए बड़ी जीत बताया जा रहा है। भारत ने जुलाई में व्यापार सुविधा समझौते (टीएफए) पर हस्ताक्षर करने से इन्कार कर दिया था। भारत का कहना था कि जब तक खाद्य सब्सिडी को लेकर डब्ल्यूटीओ में स्थायी समाधान नहीं ढूंढा जाता, तब तक वह टीएफए पर हस्ताक्षर नहीं करेगा।  - हालांकि, भारत ने उस वक्त भी यह स्पष्ट कर दिया था कि वह मूलतः इस समझौते के खिलाफ नहीं है। लेकिन, भारत की खाद्य सुरक्षा की जरूरतों को देखते हुए ऐसा करना आवश्यक है। - ताजा बातचीत में दोनों देशों के बीच सहमति बनी है कि भारत की खाद्य सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण "पीस क्लॉज" को तब तक जारी रखा जाएगा जब तक इस दिशा में स्थायी समाधान नहीं मिल जाता। इसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है। - डब्ल्यूटीओ के बाली समझौते के मुताबिक पीस क्लॉज 2017 तक लागू रहना था। इसके तहत खाद्यान्न भंडारण के लिए दी जाने वाली सब्सिडी को लेकर विकासशील देशों के खिलाफ डब्ल्यूटीओ में चुनौती नहीं देने का प्रावधान है। - दोनों देशों ने इस दिशा में हो रही देरी की प्रक्रिया को रोक लिया है। उम्मीद है अब समूचे बाली पैकेज को लागू किया जा सकेगा। - दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते के बाद अब डब्ल्यूटीओ की आम सभा दिसंबर के दूसरे सप्ताह में इस पर विचार करेगी।  - आम सभा डब्ल्यूटीओ की फैसला लेने वाली सबसे ताकतवर संस्था है =>”क्यों था भारत को एतराज” - भारत ने डब्ल्यूटीओ से कृषि सब्सिडी की गणना के मानक बदलने के लिए कहा था, ताकि वह न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से खाद्यान्नों की खरीद कर सके। साथ ही डब्ल्यूटीओ के मानकों का उल्लंघन किए बगैर गरीबों को उसे सस्ती दरों पर बेच सके। - मौजूदा नियमों में खाद्यान्न सब्सिडी की सीमा तय है। यह खाद्यान्न उत्पादन के कुल मूल्य के दस फीसद के बराबर है। इस सब्सिडी की गणना भी दो दशक पहले के मूल्यों को लेकर की जानी है। - भारत को इस बात का अंदेशा रहा है कि यदि उसका खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम पूरी तरह से लागू हुआ तो वह सीमा को पार कर जाएगा। =>अब क्या होगा पीस क्लॉज के तहत खाद्य सब्सिडी की सीमा पार कर जाने पर भी डब्ल्यूटीओ के सदस्य को जुर्माने से छुटकारा मिलेगा। दूसरे शब्दों में अब उस पर दस फीसद की मौजूदा सीमा लागू नहीं होगी।

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