विभिन्न राज्यों के बीच लंबित जल विवाद

जिन विभिन्‍न अंतर्राज्‍यीय जल विवादों का विभिन्‍न ट्रिब्‍यूनलों को समाधान निकालने के लिए सौंपा गया है, उनकी स्थिति इस प्रकार है -

1. रावी और व्‍यास जल विवाद ट्रिब्यूनल-  - इस विवाद में पंजाब, हरियाणा और राजस्‍थान शामिल हैं। इसे अप्रैल, 1986 में गठित किया गया था। वर्तमान स्थिति के अनुसार यह मामला उच्‍चतम न्‍यायालय में लम्बित और विचाराधीन है।

 

2. कावेरी जल विवाद ट्रिब्‍यूनल-  - इस विवाद में केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और पुड्डूचेरी शामिल हैं। इसे जून, 1990 में गठित किया गया था। वर्तमान स्थिति यह है कि उच्‍चतम न्‍यायालय के समक्ष विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है और मामला अदालत के विचाराधीन है।

 

3. कृष्‍णा जल विवाद ट्रिब्‍यूनल-  - 2 अप्रैल, 2004 में इसकी शुरूआत हुई थी और इसमें कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्‍ट्र शामिल है। इस ट्रिब्‍यूनल की अवधि अगस्‍त, 2014 से दो वर्ष के लिए बढ़ा दी गई है। उच्‍चतम न्‍यायालय के आदेश के अनुसार केन्‍द्र सरकार और राज्‍यों ने सरकारी गजट में इसके फैसले प्रकाशित नहीं किए हैं। मामला विचाराधीन है।

 

4. वसुन्‍धरा जल विवाद ट्रिब्‍यूनल - - फरवरी, 2010 में गठित इस ट्रिब्यूनल में आंध्रप्रदेश और ओडिशा शामिल हैं। इस ट्रिब्यूनल ने अभी तक रिपोर्ट और फैसले नहीं दिये हैं ओडिशा ने एक सदस्यीय ट्रिब्यूनल के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका दायर की है जो लंबित है। इस तरह से यह मामला अदालत के विचाराधीन है।

 

5. महादायी जल विवाद ट्रिब्यूनल-  - नवम्बर, 2010 में गठित इस ट्रिब्यूनल में गोवा, कर्नाटक और महाराष्ट्र शामिल हैं। इस ट्रिब्यूनल ने अभी तक कोई रिपोर्ट या फैसला नहीं दिया है। इसके अलावा केन्द्र सरकार ने तीन सदस्यों एक सुपरवाइजरी कमेटी गठित की है जो मुल्ला पेरियार डाम के कार्यान्वयन आदेश और 24.10.2013 को बभली बाँध के संबंध में उच्चतम न्यायालय के आदेश को लागू करवाने का काम कर रहा है।

Back to Top