आंगनवाड़ी केंद्र

समेकित बाल विकास सेवा स्कीम के योजनाबद्ध मानकों के अनुसार, आंगनवाड़ी केंद्र (एडब्ल्यूसी)/ लघु आंगनवाड़ी केंद्र छह सेवाओं का पैकेज उपलब्ध कराते हैं नामतः (i) पूरक पोषण,  (ii) स्कूल पूर्व अनौपचारिक शिक्षा,  (iii) पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा,  (iv) प्रतिरक्षण  (v) स्वास्थ्य जांच और  (vi) रैफरल सेवाएं जिनमें से बाद की तीन सेवाएं स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की जन स्वास्थ्य प्रणालियों की समभिरूपता से उपलब्ध कराई जाती हैं।

 

- आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थापना के लिए सामान्य दिशा-निर्देश जनसंख्या मानकों पर आधारित हैं अर्थात ग्रामीण शहरी क्षेत्रों में 400-800 जनसंख्या पर एक आंगनवाड़ी केंद्र खोला जा सकता है

 

- जनजातीय/पहाड़ी क्षेत्रों में, 300-800 की जनसंख्या पर एक आंगनवाड़ी केंद्र स्थापित किया जा सकता है। 

 

संयुक्त राष्ट्र की घटते लिंग अनुपात पर रिपोर्ट :-> रिपोर्ट में कहा गया है कि

- भारत में माता-पिता अपनी लड़कियों के लिए योग्य वर ढूंढ़ने में खुद को अक्षम पाते हैं और 

 

- शादी के समय उन पर भारी-भरकम दहेज देने का समाज का दबाव भी होता है। 

 

- इन सब वजहों से भारत में बच्चियों को बोझ समझा जाता है।

 

- रिपोर्ट के अनुसार,"वर्तमान सामाजिक प्रक्रियाओं के अनापेक्षित परिणाम, माता-पिता की अपनी जवान होती बच्चियों के प्रति चिंता, अत्यधिक प्रतिस्पर्धा वाला शादी का बाजार, ये तीनों जब एक साथ मिलते हैं तो बच्चियों को जन्म से ही परिवार के लिए बोझ समझ लिया जाता है।

 

- दूसरी तरफ लड़कों को परिवार में कई धार्मिक व आर्थिक जिम्मेदारियां निभाने वाला माना जाता है। 

 

- उन पर कुनबे को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी होती है। 

 

- यही सब चीजें भारत के घटते बाल लिंग अनुपात की असल वजह हैं। 

 

- रिपोर्ट में कहा गया कि तेज आर्थिक विकास वाले समय में भारत में सबसे तेज गति से लिंग अनुपात में कमी आई है।

 

- इसकी शुरुआत उत्तरी व उत्तर पश्चिम भारत से हुई। 

 

- अध्ययन में कहा गया है कि माता-पिता लड़कियों के खिलाफ नहीं होते, लेकिन उनकी ख्वाहिश दो बच्चों की होती है, जिनमें से कम से कम एक लड़का हो।

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