पहाड़ी इलाकों में बादल का फटना एक भयंकर की प्राकृतिक आपदा है

=>क्या है बादल फटना ? - बादल फटने की घटना स्थानीय स्तर पर मौसम में होने वाला बदलाव है।

- इसका मतलब एक छोटे से इलाके में कुछ मिनटों के भीतर भारी बरसात होना है, जिसके चलते बाढ़ आना, जमीन खिसकना, घरों का ढहना और बड़े पैमाने पर मौतें होती हैं। मैदानी क्षेत्रों की अपेक्षा पहाड़ी क्षेत्रों में बादल ज्यादा फटते हैं। क्या कहते हैं मौसम वैज्ञानिक?

- मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, प्रति घंटा 100 मिलीमीटर (3.94 इंच) के बराबर या उससे ज्यादा बारिश बादल फटना है। 

- इस दौरान जो बादल बनता है वह जमीन से 15 किलोमीटर की ऊंचाई तक जा सकता है। 

- बादल फटने के दौरान कुछ मिनटों में 20 मिलीमीटर से ज्यादा बरसात हो सकती है।  कैसे होती है यह घटना?

- कई शोधकर्ताओं का कहना है कि बादल फटने की घटना किसी सीमित इलाके में जबर्दस्त चक्रवात का नतीजा होती है। 

- इस चक्रवात की वजह से संवहन धाराएं (वैसी हवाएं जिनकी रफ्तार काफी तेज या कम होती है) बनती हैं। ये धाराएं नमी से भरी हवाआंे को तेजी से ऊपर उठाती हैं जिससे घने बादल (ऐसे बादलों में करंट होता है और बिजली बनती है) बनते हैं और ये बादल पानी को काफी तेज रफ्तार से बरसाते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में क्यों ज्यादा फटते हैं बादल?

- खड़ी पहाड़ियां ऐसे बादलों को बनने में मदद करती हैं। ढलान से नीचे आने वाला पानी मलबा, पत्थर और पेड़ों को काफी तेजी से मैदान की ओर लाता है जिससे तबाही मच जाती है। क्या इसकी भविष्यवाणी की जा सकती है?

- ऐसी कोई संतोषजनक तकनीक नहीं है जिससे बादल फटने की भविष्यवाणी की जा सके। 

- इसके लिए बेहद अच्छे रेडार नेटवर्क की जरूरत होगी। लेकिन यह काफी खर्चीला होगा।

- ऐसे इलाके जहां भारी बरसात होने की आशंका हो उनकी पहचान की जा सकती है। ऐसे इलाकों और मौसम संबंधी परिस्थितियों का पता लगाकर काफी हद तक तबाही से मचा जा सकता है।

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