ब्रिक्स का सूक्ष्म छिद्रान्वेषण

क्या है ब्रिक्स? - अंग्रेज़ी अक्षरों बी.आर.आई.सी.एस. से बना शब्द 'ब्रिक्स' दुनिया की पांच उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है.

- जैसा कि नाम से अनुमान लगाया जा सकता है, ये देश हैं - ब्राज़ील, रुस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका.

 

- दक्षिण अफ़्रीका के इस आर्थिक समूह से जुड़ने से पहले इसे 'ब्रिक' ही कहा जाता थ

- 'ब्रिक' शब्दावली के जन्मदाता जिम ओ'नील हैं. ओ'नील ने इस शब्दावली का प्रयोग सबसे पहले वर्ष 2001 में अपने शोधपत्र में किया था.

- उस शोधपत्र का शीर्षक था, "बिल्डिंग बेटर ग्लोबल इकोनॉमिक ब्रिक्स". ओ'नील अंतरराष्ट्रीय वित्तीय कंसलटेंसी गोल्डमैन सैक्स से जुड़े हैं.

- जिम ओ'नील के इस प्रसिद्ध शोधपत्र के आठ साल बाद ब्रिक देशों की पहली शिखर स्तर की आधिकारिक बैठक 16 जून 2009 को रुस के येकाटेरिंगबर्ग में हुई.

- लेकिन इससे पहले ब्रिक देशों के विदेश मंत्री मई 2008 में एक बैठक कर चुके थे. - इसके बाद वर्ष 2010 में ब्रिक का शिखर सम्मेलन ब्राज़ील की राजधानी ब्रासिलीया में हुई. 

 

भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स सम्मलेन के लिए ब्राज़ील गए हुए हैं , चलो आज हम ब्रिक्स की संकल्पना और उससे जुड़े तथ्यों के बारे में जानते हैं :-

 

- ब्रिक्स का आइडिया सबसे पहले इनवेस्ट बैंक गोल्डमैन सैक्स के चेयरमैन जिम ओ नील ने 2001 में की थी. - दिसंबर, 2010 से पहले तक इस समूह में दक्षिण अफ़्रीका शामिल नहीं हुआ था, इसे तब ब्रिक देशों के नाम से जानते थे. साउथ अफ़्रीका के शामिल होने के बाद इसमें 'एस' जोड़ा गया तो ये ब्रिक्स बन गया.

 

- इन देशों की सालाना बैठक किसी सदस्य देश की मेज़बानी में होती है, 2012 की शिखर बैठक भारत में हुई थी.

- दुनिया के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इन पाँचों देश की हिस्सेदारी 21 फ़ीसदी के करीब है. बीते 15 सालों में दुनिया भर के जीडीपी में इनकी हिस्सेदारी तीन गुना बढ़ी है.

- ब्रिक्स देशों में दुनिया भर की करीब 43 फ़ीसदी आबादी रहती है.

- ब्रिक्स देशों के पास कुल मिलाकर करीब 44 खरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है.

- ब्रिक्स देशों के बीच आपसी कारोबार लगभग 300 अरब डॉलर तक पहुँच गया है,

- 2015 तक इसके 500 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. 2002 में यह महज 27.3 अरब डॉलर था.

***ब्रिक्स विकास बैंक का गठन , भारत से होगा इसका पहला अध्यक्ष***

- ब्रिक्स सम्मेलन ने 100 अरब डॉलर की शुरूआती पूंजी के साथ नये विकास बैंक की स्थापना की है.

- विकास बैंक का अध्यक्ष भारत से ही कोई बनेगा. इसे भारत के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है.

- इस पूंजी के लिए शुरूआती अंशदान में संस्थापक सदस्यों की बराबर भागीदारी होगी. 

- भारत इस बात पर जोर देता रहा है कि इस पर किसी भी सदस्य देश का वर्चस्व न हो. 

- शुरूआती अंशदान पूंजी 50 अरब डॉलर की होगी जो संस्थापक सदस्य बराबर बराबर साझा करेंगे. हालांकि, चीन ने बैंक का मुख्यालय शंघाई में बनाए जाने की दौड़ जीत ली जबकि भारत ने भी नयी दिल्ली में इसे बनाना चाहा था.

- पांच राष्ट्रों की सदस्यता वाले समूह की शिखर बैठक में बैंक और 100 अरब डॉलर के शुरूआती आकार के साथ एक

 

***‘कंटींजेंसी रिजर्व अरेंजमेंट’*** स्थापित करने का समझौता हुआ है.

- घोषणापत्र के मुताबिक वास्तविक या संभावित संक्षिप्त अवधि के भुगतान संतुलन के दबाव के जवाब में यह समझौता ‘करेंसी स्वैप’ के जरिए तरलता का प्रावधान करने वाला ढांचा है. 

- ब्रिक्स ने ब्रिक्स एक्सपोर्ट क्रेडिट और गारंटी एजेंसियों के बीच सहयोग पर भी एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया

- इससे सदस्य देशों के बीच व्यापार संबंधी अवसरों को बढ़ाने के लिये जरूरी माहौल में सुधार को बल मिलेगा. 

- बैंक का प्रथम अध्यक्ष भारत होगा जबकि संचालन मंडल बोर्ड का प्रथम अध्यक्ष रूस से होगा.

- नये विकास बैंक का अफ्रीकी क्षेत्रीय केंद्र दक्षिण अफ्रीका में होगा. सम्मेलन में स्वीकार किए गए फोर्तालेजा घोषणापत्र में नेताओं ने कहा, ‘हम अपने वित्तमंत्रियों को निर्देश देते हैं कि वे इसके संचालन के लिए तौर तरीकों पर काम करें.’ शुरूआती अंशधारिता पूंजी की समान साझेदारी पर भारत का जोर इस बात को लेकर रहा है कि ब्रिक्स बैंक भी अमेरिका के आधिपत्य वाले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक सरीखे ब्रेटन वुड्स संस्थानों का रूप नहीं ले. 

 

- बैंक और सीआरए की स्थापना की सराहना करते हुए मोदी ने पूर्ण सत्र में कहा कि बैंक से अब न सिर्फ सदस्य राष्ट्रों को फायदा होगा बल्कि विकासशील विश्व को भी फायदा होगा. 

- बड़ी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अस्थिरता के परिप्रेक्ष्य में आर्थिक स्थिरता को सुरक्षित रखने में ये दोनों संस्थान अब नये माध्यम होंगे.  - उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और वित्तीय संस्थानों में सुधारों की बड़ी जरूरत है ताकि जमीनी सचाई जाहिर हो सके तथा एक नया वित्तीय ढांचा तैयार हो सके.

- घोषणापत्र में कहा गया है कि सदस्य देशों का मानना है कि सतत विकास और आर्थिक वृद्धि को उन स्थानों पर राजस्व कराधान से बढ़ावा मिलेगा जहां अर्थिक गतिविधि हो रही हो.

- ब्रिक्स देशों ने कर प्रशासनों से जुड़े मुद्दे पर सहयोगी रुख जारी करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.

- घोषणापत्र में कहा गया है कि सदस्य देश 2010 के आईएमएफ सुधारों के लागू नहीं होने को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं.

- भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संगठनों में सुधार के साथ डब्ल्यूटीओ में भी सुधार होना चाहिए ताकि एक मजबूत वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए जरूरी एक खुली कारोबार प्रणाली विकासशील दुनिया की आकांक्षाओं को अवश्य पूरा करें. 

- नये विकास बैंक और सीआरए पर समझौते पर वित्त राज्यमंत्री निर्मला सीता रमन सहित पांचों देशों के मंत्रियों ने हस्ताक्षर किया. 

- घोषणापत्र में कहा गया है कि ब्रिक्स ने कहा है कि अन्य उभरते बाजारों और विकासशील देशों द्वारा बुनियादी ढांचागत संबंधी खाई की भरपाई और सतत विकास की जरूरतों का हल करने में आने वाली महत्वपूर्ण वित्तीय बाधाओं का सामना किया जाना जारी रहेगा.

- ठोस बैंकिंग सिद्धांतों पर आधारित घोषणापत्र में कहा गया है कि बैंक ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग मजबूत करेगा और वैश्विक विकास के लिए बहुपक्षीय एवं क्षेत्रीय वित्तीय संस्थाओं की कोशिश में मदद करेगा.

- इस तरह मजबूत, सतत और संतुलित आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने के हमारे सामूहिक लक्ष्य में योगदान मिलेगा. 

- इसमें कहा गया है कि ब्रिक्स सीआरए एक सकारात्मक एहतियाती कोशिश होगी. इससे देशों को संक्षिप्त अवधि के मुद्रा के प्रवाह के दबाव का सामना करने में मदद मिलेगी और वैश्विक वित्तीय सुरक्षा मजबूत होगी.

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